भोपाल: नगर निगम में सीआर को लेकर कर्मचारी परेशान हैं. क्योंकि उनकी सीआर को तैयार ही नहीं किया गया था. अब सीआर विभाग के पास मौजूद नहीं है और जो है वह अधूरी है. अब सीआर का प्रपत्र संबंधित कर्मचारी को सौंपते हुए कहा गया है कि इस तत्कालीन अधिकारी से भरवाकर हस्ताकर करवाकर लाएं उसके बाद भी पदोन्नति की मिल पाएगी. जबकि यह सीआर वह प्रपत्र है जिसकी जानकारी कर्मचारी को भी नहीं दी जाती है. वह सर्विस रिकार्ड में मौजूद रहती है. इस तरह से नगर निगम में गोपनीयता ही उजागर कर दी है.
सीआर मतलब गोपनीय चरित्रावली
सीआर एक वह प्रपत्र है जो कर्मचारी का विभागीय चरित्र दर्ज किया जाता है. उसमें कर्मचारी के वार्षिक कार्य प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है. जिसमें उनकी शिकायत, जांच या कर्मचारी पर की गई कार्रवाई दर्ज की जाती है. साथ ही उसके कार्य करने की दक्षता और उसके कार्य क्षेत्र जनता से व्यवहार भी दर्शाया जाता है. उसका कार्य के प्रति कितनी ईमानदारी और अनुशासन में रहकर कार्य किया है. इसके अलावा मुख्य रुप से वरिष्ट अधिकारियों ने उसके इन सभी बिंदुओं को लेकर सीआर किया गया उल्लेख दर्ज रहता है. यइ सब कारण पदोन्नति के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. इसकी जनकारी कर्मचारी को भी नहीं होती है.
अधिकतर कर्मचारी सीआर अधूरी
प्राप्त जानकारी अनुसार निगम में 638 कर्मचारियों अधिकारियों को पदोन्नति दी जाना है. उनमें से 621 कर्मचारी द्वितीय और तृतीय श्रेणी हैं. वर्षों से पदोन्नति नहीं होने से उन्होंने सीआर तैयार नहीं करवाई. इस वजह से केवल 19 कर्मचारियों को ही पदोन्नति मिल सकी है. वहीं, शासन ने पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तिथि 30 जुलाई निर्धारित की है.
सीआर के लिए अधिकारी को देना चाहिए नोटिस
निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि अगर कोई कर्मचारी सीआर के लिए नहीं आता है तो उसका वरिष्ठ अधिकारी को नियमानुसार समय उपरांत तीन महिने के अंदर कर्मचारी को नोटिस जारी करना अनिवार्य है. जिससे कर्मचारी सीआर लिखवाने बाध्य हो जाए. लेकिन नगर निगम में किसी भी कर्मचारी को कभी नोटिस जारी नहीं किया गया.
