इंदौर: मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने देवास की तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त से जुड़े बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर रद्द कर दी. साथ ही सिंगल बेंच का वह आदेश भी निरस्त कर दिया, जिसमें सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए थे.
जस्टिस संदीप एन. भट्ट और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने कहा कि कानून में उपलब्ध वैधानिक प्रक्रिया अपनाए बिना सीधे एफआईआर दर्ज कराने और सीबीआई जांच के निर्देश देना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था.
अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता के पास पहले से वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध थे, जिनका उपयोग किया जाना चाहिए था. खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतकर्ता अब भी कार्रवाई चाहता है तो उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी. इसके बाद सक्षम प्राधिकारी अथवा संबंधित अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगी. अदालत ने इसी आधार पर सिंगल बेंच का आदेश और उसके बाद दर्ज सीबीआई की एफआईआर दोनों को निरस्त कर दिया.
