इंदौर: शहर के पोलोग्राउंड स्थित चंबल 132 केवी अति उच्चदाब ग्रिड पर बिजली आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए विशेष डक्ट निर्माण का कार्य किया जा रहा है. करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे इस नवाचार के तहत डक्ट की निचली परत से वर्षा जल की निकासी होगी, जबकि ऊपरी हिस्से में 33 केवी की भूमिगत विद्युत केबलें बिछाई जाएंगी.
मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा शहर के सबसे पुराने बिजली केंद्र से निकलने वाले 16 उच्चदाब (33 केवी) फीडरों को आधुनिक भूमिगत केबल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है. कंपनी के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह के निर्देश पर किए जा रहे इस कार्य से शहर के उत्तर, पूर्व, पश्चिम और मध्य संभाग के कई ग्रिड सीधे जुड़ेंगे, जिससे बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार होगा और तकनीकी शिकायतों में कमी आएगी.
अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था में पर्याप्त स्टैंडबाय सिस्टम भी रहेगा. किसी फीडर में खराबी आने पर वैकल्पिक केबल के माध्यम से कुछ ही समय में बिजली आपूर्ति बहाल की जा सकेगी।. इससे तेज हवा, केबल क्रॉसिंग और तकनीकी व्यवधानों से होने वाले बिजली अवरोध भी कम होंगे. रोचक तथ्य यह है कि डक्ट निर्माण के लिए की गई खुदाई के दौरान कोयले के अवशेष भी मिले हैं. माना जा रहा है कि ये अवशेष होलकर शासनकाल में पोलोग्राउंड क्षेत्र में कोयला और पानी से बिजली उत्पादन की ऐतिहासिक विरासत की ओर संकेत करते हैं.
चंबल ग्रिड से जुड़े 16 फीडरों के माध्यम से शहर की लगभग 800 कॉलोनियों, बाजारों और प्रमुख मार्गों में बिजली आपूर्ति होती है, जो इंदौर के करीब 15 प्रतिशत हिस्से को कवर करती है। बिजली कंपनी का दावा है कि परियोजना पूरी होने के बाद इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और अधिक स्थिर एवं भरोसेमंद होगी।
