
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने जबलपुर-मंडला-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-30) स्थित नागा घाटी में लगातार हो रहे भूस्खलन और यात्रियों की सुरक्षा के गंभीर मुद्दे पर शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाया। न्यायालय ने जनहित याचिका में जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर मध्य प्रदेश सडक़ विकास प्राधिकरण (एमपीआरडीसी) पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जुर्माने की राशि के साथ अपना स्पष्टीकरण भी अगली सुनवाई में प्रस्तुत किया जाए।
यह जनहित याचिका जबलपुर निवासी डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया है कि बरेला के आगे करीब 2.6 किलोमीटर लंबी नागा घाटी में बरसात के दौरान लगातार भूस्खलन होता है। पहाडिय़ों से भारी चट्टानें और पत्थर सीधे हाईवे पर गिरते हैं, जिससे हर समय बड़े सडक़ हादसे की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजमात नहीं किये जाते। उक्त मामले में न्यायालय ने अनावेदकों को पूर्व में जवाब पेश करने के निर्देश दिये थे।
