महाकाल सवारी बनी सिंहस्थ की तैयारियों का निर्णायक आधार

उज्जैन: यदि इस समय सावन पर्व नहीं आता या बाबा महाकाल की सवारी का दौर नहीं होता तो संभवतः शहर के चौड़ीकरण और सड़क निर्माण कार्यों की रफ्तार पहले जैसी ही धीमी बनी रहती. अब जिस तरह 3 अगस्त को सावन की पहली सवारी परंपरागत मार्ग से निकले, और वर्षों पुराने रीती रिवाजों में कोई बदलाव न हो, मार्ग परिवर्तित न करना पड़े, इसके लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने पूरी ताकत झोंक दी है. यही कारण है कि लंबे समय से सुस्त गति से चल रहे चौड़ीकरण कार्य अब दिन के साथ रात में भी युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं.

दरअसल, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत शहर के प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण और विकास कार्य चल रहा है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण वही मार्ग है, जहां से बाबा महाकाल की शाही सवारी निकलती है. सावन की सवारी नजदीक आते ही प्रशासन की प्राथमिकता बदल गई है और अब पूरे फोकस के साथ निर्माण कार्यों को समय-सीमा में पूरा करने की कवायद शुरू हो गई है.

रात्रि कालीन कार्यों से जगी उम्मीद
इसी कड़ी में निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा प्रतिदिन देर रात स्वयं सवारी मार्ग पर पहुंच रहे है, कंठाल चौराहा, छत्री चौक और कमरी मार्ग, रामघाट, हरसिद्धि की पाल, गणगौर का दरवाजा तक पहुंच रहे है, तथा निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं होगी. उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण, प्रीकास्ट नालियां, पेयजल पाइपलाइन शिफ्टिंग, विद्युत पोल स्थानांतरण, मंदिरों के विस्थापन, छज्जों के निराकरण, डीएलसी-पीक्यूसी सड़क निर्माण और चौराहों के विकास सहित सभी कार्य गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय में पूरे किए जाएं. इसके लिए दिन और रात्रि दोनों शिफ्टों में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं.

पूरा मार्ग 80′ तैयार
प्रशासन की कोशिश है कि परंपरागत मार्ग पूरी तरह तैयार रहे, ताकि बाबा महाकाल की शाही सवारी हर वर्ष की तरह उसी ऐतिहासिक मार्ग से निकले और सदियों पुरानी परंपरा अक्षुण्ण बनी रहे. यही कारण है कि रात में भी अधिकारियों की निगरानी बढ़ा दी गई है और निर्माण एजेंसियों की कार्य क्षमता भी बढ़ाई गई है. सवारी मार्ग 80′ तैयार हो चुका है.

श्रद्धालुओं को सुगमता
महापौर मुकेश टटवाल ने भी निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर अधिकारियों को शेष कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सिंहस्थ और बाबा महाकाल की शाही सवारी, दोनों की दृष्टि से यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है. सभी निर्माण कार्य स्थायी गुणवत्ता के साथ समय पर पूरे हों, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिल सके.

धार्मिक परंपरा बनी रहे
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि महाकाल की शाही सवारी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर के विकास कार्यों की गति तय करने वाला सबसे बड़ा अवसर भी बन गई है. सवारी की समय-सीमा ने वर्षों से लंबित चौड़ीकरण कार्यों में नई ऊर्जा भर दी है. अब लक्ष्य सिर्फ निर्माण पूरा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि 3 अगस्त को बाबा महाकाल की पहली सवारी बिना किसी व्यवधान के अपनी परंपरागत राह से निकले और उज्जैन की धार्मिक परंपरा की गरिमा बनी रहे.

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