
खंडवा।दादाजी भक्तों की वर्षों पुरानी मुराद अब श्री दादाजी महाराज के आशीर्वाद से मूर्त रूप लेने जा रही है। लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भव्य श्री दादाजी धाम मंदिर के निर्माण कार्य ने अब तेज गति पकड़ ली है। मकराना के सफेद संगमरमर से बनने वाले इस दिव्य मंदिर के लिए पहली नक्काशीदार शिला (प्रथम पिल्लर) खंडवा पहुंच चुकी है। बुधवार को गणमान्य जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इस प्रथम पिल्लर का विधिवत पूजन संपन्न हुआ।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ प्रथम पिल्लर का पूजन
आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (गुप्त नवरात्रि) के शुभ अवसर पर श्री छोटे दादाजी की आज्ञा से इस प्रथम मार्बल शिला का पूजन किया गया। मध्य प्रदेश के जनजातीय कल्याण कैबिनेट मंत्री डॉ कुंवर विजय शाह, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायक कंचन तनवे और कलेक्टर ऋषभ गुप्ता सहित समिति सदस्यों ने इस शिला का पूजन किया। पंडित अवधेश ओझा द्वारा पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई गई। पूजन के पश्चात सांसद ने अपने हाथों से उपस्थित सभी लोगों को मिठाई खिलाकर इस ऐतिहासिक पल की खुशी साझा की। इसके साथ ही, सांसद और कलेक्टर ने निर्माण स्थल का जायजा लेते हुए उपस्थित ठेकेदारों और समिति के सदस्यों को इन शिलाओं को शीघ्र ही मंदिर प्रांगण में असेंबल करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर अधिवक्ता राकेश थापक, एडीएम सृष्टि गोडा देशमुख, एसडीएम श्री सिंघई, ट्रस्टी शांतनु दीक्षित, ठेकेदार नितिन मिश्रा, राहुल बिसेन सहित बड़ी संख्या में दादाजी भक्त मौजूद रहे।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के समान मकराना मार्बल से होगा निर्माण :
प्रस्तावित मंदिर की डिजाइन और 3D नक्शे के अनुसार, यह मंदिर अपनी दिव्यता और वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण होगा। मंदिर का निर्माण मकराना के उसी उच्च गुणवत्ता वाले सफेद मार्बल से किया जाएगा, जिसका उपयोग अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में किया गया है। इस भव्य निर्माण में लगभग 1.10 लाख घनफुट मार्बल का उपयोग होना है। वास्तुकला के इस अनूठे प्रोजेक्ट के तहत मंदिर 23,616 वर्गफीट के विशाल क्षेत्रफल में आकार लेगा, जिसकी सामने की चौड़ाई 164 फीट और पीछे तक की लंबाई 144 फीट निर्धारित की गई है।
108 खंभों और भव्य शिखरों से झलकेगी अलौकिकता :
नवनिर्मित मंदिर की भव्यता इसके शिखरों और खंभों में स्पष्ट रूप से नजर आएगी। बड़े दादाजी मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई 101 फीट होगी, जबकि छोटे दादाजी और नर्मदा माई मंदिर के शिखरों की ऊंचाई 71-71 फीट रखी जाएगी। संपूर्ण मंदिर का प्रांगण 18 फीट ऊंचे कुल 108 खंभों पर निर्मित होगा। इनमें से 84 खंभे प्रकट अवस्था में श्रद्धालुओं को नजर आएंगे, जबकि 24 खंभे दोनों समाधियों के गर्भगृह की दीवारों के भीतर समाहित होंगे।
2030 तक निर्माण पूर्ण करने का ऐतिहासिक लक्ष्य :
मंदिर नव-निर्माण समिति ने इस विशाल और दिव्य प्रोजेक्ट को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह वर्ष आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्ष 2030 में बड़े दादाजी महाराज के समाधिस्थ होने के पूरे 100 वर्ष (शताब्दी वर्ष) पूर्ण हो रहे हैं। निर्माण पूर्ण होने के बाद यह भव्य मंदिर दादाजी भक्तों के लिए एक अद्वितीय और अलौकिक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में अपनी छटा बिखेरेगा।
