दिल्ली डायरी
प्रवेश कुमार मिश्र
लोकसभा में नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी पार्टी के अंदर मौजूद युवा नेताओं को न सिर्फ आगे बढ़ाकर पार्टी के अंदर पीढ़ीगत बदलाव को महत्व दे रहे हैं बल्कि ऐसे नेताओं के खिलाफ खड़े होने वाले वरिष्ठ नेताओं के सामने कवच बन खड़े रह रहे हैं. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पिछले दिनों पंजाब में जिस तरह से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के खिलाफ मोर्चाबंदी कर उन्हें पदमुक्त करने के लिए दबाव बनाया था उससे ऐसा लगने लगा था कि चुनावी राज्य होने के नाते पार्टी हाईकमान कोई अप्रत्याशित फैसला कर सकता है.
लेकिन इस दबाव को महत्वहीन करते हुए राहुल गांधी ने न सिर्फ खुद ही कवच बनकर प्रदेश अध्यक्ष का बचाव किया बल्कि वरिष्ठ नेताओं को सख्त लहजे में संदेश देकर मामले को शांत करने को कहा है. संभवतः इसी वजह से कहा जा रहा है कि पार्टी महासचिव सचिन पायलट, मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी, सेवादल के नवनियुक्त प्रमुख बीबी श्रीनिवासन, असम के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा समेत कई युवा नेताओं के खिलाफ किसी भी लाबिंग को राहुल गांधी समर्थन नहीं करते हैं बल्कि उन्हें मौका देते रहने की वकालत करते हैं.
हंगामेदार रह सकता है संसद का मानसून सत्र
अगले सप्ताह से आरंभ होने जा रहा संसद का मानसून सत्र हंगामेदार हो सकता है. क्योंकि विपक्षी दलों के रणनीतिकारों ने राममंदिर चढ़ावा चोरी मामला, आपरेशन सिन्दूर के संदर्भ में रक्षा मंत्री द्वारा कथित तौर पर गलत जानकारी देने को लेकर विशेषाधिकार हनन नोटिस देने,नीट-यूजी परीक्षा में कथित धांधली और देश के अन्य हिस्सों में हुए भर्ती पेपर लीक मामले, 130 वां संविधान संशोधन विधेयक जिसमें मंत्रियों की बर्खास्तगी का प्रावधान है, महंगाई, बेरोजगारी, महिला आरक्षण व परिसीमन विधेयक जैसे विषयों पर सरकार को घेरने की ठोस रणनीति बनाई है जिसके सदन में हंगामा तय माना जा रहा है.
वांगचुक का अनशन
परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर चल रहे अनशन का चौदहवां दिन होने के बाद वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वे इस लड़ाई को तार्किक अंत तक ले जाने के लिए तैयार हैं और जब तक सरकार वार्ता की मेज पर नहीं आती, वे अनशन जारी रखेंगे. अनशन के कारण लगभग आठ किलो वजन घटा चुके वांगचुक की ओर से 20 जुलाई को संसद मार्च की घोषणा सरकार के लिए परेशान करने वाली है. वांगचुक का कहना है कि अनशन आमरण है.
अमीर बनाम गरीब की लड़ाई बनाने में जुटे भाजपाई
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा खाली की गई सीट पर हो रहे उपचुनाव में अपने घोषित उम्मीदवार को बदलकर दूसरे उम्मीदवार को लड़ाने के भाजपाई फैसले को विपक्षी दलों द्वारा भले ही भाजपा की आंतरिक उठापटक का परिणाम बताया जा रहा है लेकिन भाजपाई इसे पार्टी की सोची समझी रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं. हालांकि कुछ लोग कह रहे हैं कि पहले घोषित उम्मीदवार के नामांकन पेपर में कुछ कमी होने के कारण दूसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया है. इतना ही नहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के पसंद के बजाय पार्टी रणनीतिक पक्ष पर आगे बढ़ी है क्योंकि प्रशांत किशोर सैकड़ों करोड़ के मालिक हैं ऐसे में उनके सामने एक सामान्य कार्यकर्ता और वह भी किसी दूसरे उम्मीदवार के मुकाबले सबसे गरीब है उसे उतारकर इस लड़ाई को अमीर बनाम गरीब की करने की कोशिश की जा रही है.
