बेंगलुरु, कर्नाटक में ‘अल-हिंद’ आतंकी साजिश मामले में बेंगलुरु की एनआईए स्पेशल कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के मुख्य आरोपियों में से एक, मोहम्मद हनीफ खान को दोषी करार देते हुए 7 साल की कड़ी कैद और 48,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह सजा दक्षिण भारत में आईएसआईएस (दाएश) का प्रभाव फैलाने की नापाक साजिश के खिलाफ एनआईए की जांच में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। हनीफ इस मामले में सजा पाने वाला पहला आरोपी है।
साजिश का पर्दाफाश और मास्टरमाइंड
एनआईए की जांच के अनुसार, मोहम्मद हनीफ खान उस मॉड्यूल का सक्रिय हिस्सा था, जिसने ट्रेनिंग कैंप स्थापित करने के लिए घने जंगलों की रेकी की थी। इस आतंकी साजिश का मास्टरमाइंड महबूब पाशा था, जिसने बेंगलुरु में गुप्त बैठकें आयोजित कर सांप्रदायिक दंगे भड़काने और प्रभावशाली हस्तियों की टारगेटेड हत्या की योजना बनाई थी। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि हनीफ ने न केवल हथियारों की तस्करी में मदद की, बल्कि फरार अन्य आरोपियों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
NIA की कड़ी निगरानी में अन्य आरोपी
इस मामले में एनआईए ने अब तक कुल 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। 2020 में बेंगलुरु पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद एनआईए ने इसकी कमान संभाली थी। बरामदगी में पिस्टल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस शामिल थे, जो देश की सुरक्षा के प्रति इनके खतरनाक मंसूबों को दर्शाते हैं। अदालत का यह कठोर निर्णय आतंकी गतिविधियों में शामिल होने वाले तत्वों के लिए एक सख्त चेतावनी है और सुरक्षा एजेंसियां शेष आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में जुटी हैं।

