नर्मदा के पानी का सपना ढाई दशक बाद सच हुआ


डॉ संजय पयासी
सतना: बंद आंखों से विकास के सपने देख रही विन्ध्य की जनता की एक पूरी पीढ़ी सिर्फ इसी उम्मीद में अपना वक्त काट गई कि जब नर्मदा का पानी विन्ध्य की धरती में आएगा तो विकास के ऊंचे आयाम तय होंगे. पिछले 17 साल से बरगी दायी तट नहर के लिए बन रही 12 किमी लंबी टनल मंगलवार की सुबह जब दूसरी तरफ से एटीबीएम मशीन की झलक दिखाई दी तो वहां वर्षों से काम कर रहे लोगों के चेहरे में मुस्कान खिल गई.उल्लेखनीय है कि  अब से ढाई दशक पहले जब नवभारत समाचार पत्र का सतना से प्रकाशन प्रारंभ हुआ तो पहली बार लोगों के बीच में यह जानकारी सामने लाई गई कि बरगी बांध से निकलने वाली दायी तट नहर का पानी विन्ध्य की धरती की प्यास को बुझा सकता है.

धीरे धीरे इस प्रयास को पंख लगे तत्कालीन सरकारों ने पहल कर रहे जनप्रतिनिधियों की रायशुमारी पर निर्णायक निर्णय लिया और विन्ध्य की जनता को यह आश्वासन मिला कि उसे दायीं तट नहर का विकास कर पानी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा. शुरू से राजनीति के फेर में पड़ी इस परियोजना को उस समय तगड़ा झटका लगा जब विशेषज्ञों ने पानी के बहाव के लिए विन्ध्य पवर्त श्रृखला का सख्त पहाड़ काटने का प्रस्ताव किया. हालांकि केन्द्र की तत्कालीन एनडीए सरकार ने इस बहुउद्द्ेश्यीय परियोजना को पूरा करने के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया. तत्कालीन केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री स्व. शरद यादव ने इसे फास्टट्रेक में शामिल कर सैकड़ों करोड़ रुपया जारी किया.

इतना ही नहीं बुंदेलखण्ड का नेतृत्व कर रही प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती भी जब केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जल संसाधन मंत्री बनी तो उन्होंने भी इस परियोजना के लिये प्रस्तावित बजट की कोई कमी नहीं होने दी. इसके बावजूद टनल के निर्माण का ठेका इस काम की अनुभवी जर्मनी की कम्पनी को दिया गया. 12 किलोमीटर टनल का काम शुरूआती दौर में कम्पनी ने 799 करोड़ में पूरा हो जाने की संभावना व्यक्त की. लेकिन दुर्भाग्य विन्ध्य की जनता का कि मशीन कुछ दिन चलने के बाद अन्दर टनल में ही फंस गई. 2011 से शुरू हुए इस काम को पूरा होने में 17 वर्ष का समय लग गया. इस दौरान टनल के लिए कई कम्पनियों ने सहयोग दिया. मंगलवार की सुबह जब अन्दर से नहर बनाती हुई एटीबीएम मशीन ने अपनी पहली झलक बाहर दिखाई तो वहां  मौजूद लोगों के चेहरे खिल गये.

16 सौ करोड़ तक पहुंचा बजट

दायीं  तट नहर निर्माण के लिए प्रस्तावित कुल बजट 799 करोड़ से बढ़ते बढ़ते 16 सौ करोड़ तक पहुंच गया है. इन ढाई दशकों में सरकार व निर्माण एजेंसी नर्मदा घाटी विकास के लिए कमाई का जरिया बन चुकी इस परियोजना के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टनल की जगह बायपास का बाहर से नहर बनाने का भी प्रस्ताव किया था परन्तु जिले के इस परियोजना को लेकर गंभीर जनप्रतिनिधियों ने दिल्ली से भोपाल तक पहल कर बायपास के वजाय टनल को ही पानी स्तर बनाये रखने के लिए  उचित माना.6 जिलों की

ढाई लाख हेक्टेयर भूमि होगी सिंचिंत

विन्ध्य व बुन्देलखण्ड के कुछ हिस्से के प्यासे खेतों को पंजाब व हरियाणा जैसी उत्पादन क्षमता देने वाली इस परियोजना का लाभ जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा व पन्ना जिले के सैकड़ों गांवों को मिलेगा.कई जिलों में नहर निर्माण का काम करीब करीब पूरा हो चुका है. 197 किलोमीटर लंबी इस नहर के चालू हो जाने से संबंधित इलाकों के किसानों को दो व तीन फसल एक वर्ष में उगाने का अवसर मिलेगा

Next Post

मुस्लिम समुदाय ने की स्लॉटर हाउस शुरू कराने की मांग

Wed Jul 15 , 2026
सीहोर। जिले के मुस्लिम समुदाय के जनप्रतिनिधियों एवं कुरैशी समाज के लोगों ने मंगलवार को कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार अमित सिंह को सौंपा. ज्ञापन में पिछले तीन माह से बंद पड़े स्लॉटर हाउस को पुन: शुरू कराने की मांग की गई. ज्ञापन में बताया कि मीट विक्रेताओं के […]

You May Like