इंदौर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर ने उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से बेंगलुरु में छठी उद्योग बैठक (सीआईसी-सीएसआर) का आयोजन किया. इंदौर और नई दिल्ली में आयोजित पांच सफल बैठकों के बाद हुए इस कार्यक्रम में बेंगलुरु एवं आसपास के क्षेत्रों की 28 प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के करीब 50 वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इनमें वोल्वो आयशर, बीएचईएल, बीईएमएल, केन्स टेक्नोलॉजी, विन्यास इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज और जी.जी. ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियां शामिल रहीं. जी.जी. ट्रॉनिक्स के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक एन. मंजूनाथ विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.
कार्यक्रम का उद्देश्य उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना, अनुसंधान एवं नवाचार के नए अवसरों की पहचान करना तथा उद्योगों की तकनीकी चुनौतियों के समाधान के लिए संयुक्त प्रयासों को प्रोत्साहित करना था. आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास एस. जोशी ने संस्थान की अनुसंधान क्षमताओं और उद्योग सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला.
उन्होंने भारत सरकार के एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) फंड की जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना 50-50 सह-वित्तपोषण मॉडल पर आधारित है, जिससे संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा. तकनीकी सत्रों में बीएचईएल और बीईएमएल के प्रतिनिधियों ने हाई-स्पीड रेल तकनीक एवं सुरक्षा प्रणालियों पर अपने अनुभव साझा किए, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैख्रिंग क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. पैनल चर्चा में एचपीसीएल आरएंडडी, टोयोटा किर्लोस्कर, वोल्वो बस, निप्पॉन कोएई मोबिलिटी और लोटस वायरलेस टेक्नोलॉजीज के अधिकारियों ने भाग लेते हुए उद्योग-अकादमिक सहयोग, नवाचार आधारित विकास और अनुसंधान के व्यावहारिक उपयोग पर विचार रखे.
