राहुल गांधी मानहानि मामला : जिरह में सात्यकि सावरकर ने माना कि उन्हें क्षमादान और दया याचिका में अंतर नहीं मालूम

पुणे, (वार्ता) श्री विनायक दामोदर सावरकर पर की गयी टिप्पणियों को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में मंगलवार को उस समय अहम मोड़ आया, जब शिकायतकर्ता सात्यकि सावरकर ने पुणे स्थित विशेष एमपी/एमएलए अदालत के समक्ष जिरह के दौरान कई बातें स्वीकार कीं।

सुनवाई के दौरान सात्यकि सावरकर ने कहा कि उनका यह दावा कि ‘यदि श्री सावरकर ने अंग्रेजों से समझौता कर लिया होता, तो वे उन्हें प्रधानमंत्री बना देते’, उनकी व्यक्तिगत राय थी।

उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें ‘सामान्य क्षमादान’ और ‘दया याचिका’ के में अंतर की जानकारी नहीं थी।

उन्होंने यह भी कहा कि वे नहीं जानते कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद राजनीतिक बंदियों को सामान्य क्षमादान का लाभ मिला था या नहीं अथवा श्री सावरकर ऐसे किसी क्षमादान के तहत आते थे या नहीं।

श्री राहुल गांधी की ओर से पेश वकील मिलिंद दत्तात्रेय पवार ने विशेष न्यायाधीश अमोल श्रीराम शिंदे के समक्ष यह जिरह की।

बचाव पक्ष ने उनसे महात्मा गांधी के 10 मई 1930 को यरवदा जेल से ब्रिटिश अधिकारी मेजर ईई डॉयल को लिखे पत्र के बारे में भी सवाल पूछे।

सुनवाई के दौरान संदर्भित इस पत्र में 100 रुपये के प्रस्तावित मासिक भत्ते, केवल आवश्यक सुविधाएं स्वीकार करने के गांधी जी के आग्रह, सादगी पर उनके जोर, कामकाजी वर्ग के प्रति उनकी चिंता और जेल प्रशासन पर उनके विचारों की चर्चा थी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिरह के दौरान अदालत के समक्ष उनके कुछ बयान उनकी व्यक्तिगत राय पर आधारित थे।

अदालत का समय समाप्त होने के कारण जिरह पूरी नहीं हो सकी। आगे की जिरह के लिए मामले की सुनवाई 30 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी गयी है।

वकील मिलिंद दत्तात्रेय पवार को अधिवक्ता ज्ञानेश्वरी जाधव, हर्षवर्धन पवार और सुयोग गायकवाड़ सहयोग दे रहे हैं।

 

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