जिले में हर साल निजी कॉलेजों से निकलते हैं सवा 14सौ डिप्लोमा होल्डर

सतना: तकनीकी ज्ञान और डिप्लोमा सर्टिफिकेट के नाम पर जिले में चल रहे निजी कॉलेजों में हो रही खुली लूट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है हर साल सवा चौदह सौ डिप्लोमाधारी एक जिले से निकल रहे हैं.अभिवावको की जेब मे डाले जा रहे इस डाके में हर छात्र से निर्धारित शुल्क से ज्यादा वसूली की जा रही है. इसकी निगरानी की कोई व्यवस्था नही है.

बेहतर भविष्य और आधुनिक सुविधाओं की चाह में इन कॉलेजों का रुख करने वाले छात्र अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। जिले में संचालित निजी तकनीकी डिप्लोमा कॉलेजों द्वारा निर्धारित शुल्क से कहीं अधिक पैसों की वसूली की जा रही है, जिससे अभिभावक आर्थिक रूप से परेशान हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन निजी शिक्षण संस्थानों पर लगाम कसने या इनकी निगरानी करने वाला कोई नहीं है, जिससे इनके हौसले बुलंद हैं और ये मनमाने ढंग से कॉलेज संचालित कर रहे हैं।

शहर में मुख्य रूप से 4 निजी कॉलेज पॉलीटेक्निक कोर्सेस का संचालन कर रहे हैं। इन कॉलेजों में विभिन्न तकनीकी शाखाओं में सैकड़ों सीटें आवंटित हैं, जहाँ हर साल बड़ी संख्या में छात्र प्रवेश लेते हैं। तकनीकी शिक्षा की आड़ में इन कॉलेजों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिया है। न तो तय नियमों का पालन हो रहा है और न ही फीस के मानकों को ध्यान में रखा जा रहा है।

श्री रामा कृष्णा कॉलेज ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट: यहाँ कुल 5 ब्रांच संचालित हैं। इनमें माइनिंग एंड माइन सर्वेइंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर एंड साइंस इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक ब्रांच में 75-75 सीटें स्वीकृत हैं।आदित्य कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस: इस कॉलेज में 6 ब्रांचों का संचालन किया जा रहा है। इसमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में सर्वाधिक 112-112 सीटें हैं, जबकि सिविल इंजीनियरिंग, माइनिंग एंड माइन सर्वेइंग, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग और सीमेंट टेक्नोलॉजी में 75-75 सीटें हैं।

विंध्य इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस: यहाँ 5 ब्रांच संचालित हो रही हैं। इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 150-150 सीटें हैं, जबकि सिविल, कंप्यूटर साइंस और माइनिंग एंड माइन सर्वेइंग में 75-75 सीटें निर्धारित हैं।इन कॉलेज में कौन छात्रों को पढ़ा रहा है. उसकी शैक्षणिक योग्यता तकनीकी शिक्षा विभाग के निर्धारित मापदण्डो के अनुकूल है या नही इसकी निगरानी की कोई व्यवस्था नही है. बताया गया है कि कुछ कालेजो में कुछ ऐसे शिक्षकों को भी सेवा में रखा गया है जो इस शहर में रहते ही नही.ऐसे में सिर्फ सर्टिफिकेट तक सीमित ज्ञान के सहारे इन कालेजो के विद्यार्थी बेरोजगारो की सूची को बढ़ा रहे हैं. इस सम्बंध में स्थानीय पॉलिटेक्निक के प्रभारी प्राचार्य से जब जानकारी चाही गई तो उन्होंने किसी प्रकार के हस्तक्षेप का अधिकार नही होने का जिक्र किया.तकनीकी शिक्षा विभाग के संचालक से भी सम्पर्क करने का प्रयास किया गया,लेकिन वे भी फोन पर उपलब्ध नही हो सके

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