भोपाल: चर्चित फिलेमोन डबल मर्डर केस की जांच में अब एक नया और गंभीर सवाल सामने आया है। जानकारी के अनुसार, घटनास्थल से बरामद देसी पिस्टल को करीब तीन सप्ताह तक न तो विधिवत जब्त किया गया, न मालखाने में दर्ज किया गया और न ही फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा गया। हत्या जैसे संवेदनशील मामलों में यह हथियार सबसे अहम वैज्ञानिक साक्ष्यों में माना जाता है, ऐसे में जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
फॉरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि हथियार से फिंगरप्रिंट, डीएनए, गनशॉट रेजिड्यू (GSR) और बैलिस्टिक साक्ष्य मिल सकते थे, जो आरोपियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते। वहीं, यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर मृतक हेमंत फिलेमोन के घर में देसी पिस्टल कैसे पहुंची और क्या उन्हें पहले से किसी खतरे की आशंका थी।
मामले की जांच में एसआईटी, क्राइम ब्रांच और साइबर सेल समेत बड़ी पुलिस टीम जुटी हुई है। सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगालने और 50 हजार रुपये का इनाम घोषित करने के बावजूद अब तक आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। ऐसे में फॉरेंसिक प्रक्रिया में कथित देरी ने पूरे हत्याकांड की जांच और साक्ष्य संरक्षण की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
