इजरायल में चुनाव का ऐलान, क्या 27 अक्टूबर को खत्म होगा नेतन्याहू का युग? जानें क्या हैं बड़े मुद्दे

इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनावों की तारीख तय हो गई है। हमास हमले और ईरान के साथ युद्ध के बाद यह पहला चुनाव पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेगा।

इजरायल में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है क्योंकि देश में अगले आम चुनावों की तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। इजरायल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होंगे।

यह चुनाव ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान और ईरान के साथ छिड़ी भीषण जंग के बाद यह देश का पहला राष्ट्रीय चुनाव होगा।

नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य की अग्निपरीक्षा
बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं, अब 76 वर्ष के उम्र में यह चुनाव उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। हालांकि नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिर से चुनाव लड़ेंगे और अपनी सरकार बनाएंगे, लेकिन हालिया सर्वे उनके पक्ष में नहीं दिख रहे हैं।

जून तक आए आंकड़ों के अनुसार, नेतन्याहू की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। मार्च में जहां 40.5% लोग उनके समर्थन में थे, वहीं अब यह आंकड़ा गिरकर महज 29.4% रह गया है।

इजरायली नागरिकों में गहरा गुस्सा
चुनाव के सबसे बड़े मुद्दों में 7 अक्टूबर 2023 के दौरान हुई सुरक्षा चूक शामिल है, जिसे लेकर इजरायली नागरिकों में गहरा गुस्सा है। इसके अलावा, हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के एक सर्वे के अनुसार, 92% से अधिक इजरायलियों का मानना है कि हालिया युद्धों में ईरान की स्थिति मजबूत रही है।

लोग अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद हुए युद्धविराम और तेहरान-वॉशिंगटन समझौते को भी इजरायल के हितों के खिलाफ मान रहे हैं, जिसका सीधा असर नेतन्याहू की रेटिंग पर पड़ा है।

चुनाव के अहम मुद्दे क्या है?
इस चुनाव में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की सेना में अनिवार्य भर्ती एक विस्फोटक मुद्दा बनकर उभरा है। नेतन्याहू के गठबंधन सहयोगी चाहते हैं कि उनके समुदाय को सेना सेवा से छूट मिले, जबकि आम जनता और सेना का मानना है कि युद्ध की वर्तमान स्थिति को देखते हुए और अधिक जवानों की जरूरत है।

इसके साथ ही नेतन्याहू पर चल रहे भ्रष्टाचार के मामले, विवादित न्यायिक सुधार और गाजा में युद्ध के बाद की व्यवस्था ऐसे विषय हैं जो मतदाताओं के रुख को प्रभावित करेंगे।

नई सरकार की संभावना
नेतन्याहू के सामने इस बार पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं। सर्वे बताते हैं कि नेतन्याहू के राष्ट्रवादी और धार्मिक दलों वाले गठबंधन को बहुमत मिलना मुश्किल लग रहा है, हालांकि विपक्ष के पास भी फिलहाल सरकार बनाने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा है। ऐसे में 27 अक्टूबर का दिन यह तय करेगा कि क्या इजरायल एक बार फिर नेतन्याहू पर भरोसा जताएगा या देश को नया नेतृत्व मिलेगा।

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