पद्मभूषण पं. सूर्यनारायण व्यास के नाम पर होगा महाकाल-हरसिद्धि मार्ग

उज्जैन: सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच महाकाल मंदिर से हरसिद्धि मंदिर तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण ने एक बार फिर पद्मभूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास के ऐतिहासिक आवास को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. खास बात यह है कि जहां चौड़ीकरण में तीन मकान सबसे बड़ी बाधा बने हुए थे, वहीं पं. सूर्यनारायण व्यास के पुत्र राजशेखर व्यास ने शहर हित को सर्वोपरि मानते हुए अपने ऐतिहासिक भारती भवन की लगभग 10 फीट जमीन स्वेच्छा से प्रशासन को देने की सहमति देकर एक मिसाल पेश की है.

महाकाल मंदिर से हरसिद्धि मंदिर तक जाने वाले मार्ग का नाम पद्मभूषण पं. सूर्यनारायण व्यास मार्ग रखा जाए. इस संबंध में नगर निगम में प्रस्ताव लाने की तैयारी चल रही है. बताया जा रहा है कि सिंहस्थ मेला प्रशासन, संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक, विकास प्राधिकरण, वीर भारत न्यास तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक यह प्रस्ताव पहुंच चुका है. पंडित राजशेखर व्यास की भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से संबंध को लेकर भेंट हुई.

बगैर मुआवजा दी जमीन
सड़क चौड़ीकरण के दौरान भारती भवन की बाउंड्री वॉल तथा वह हिस्सा भी प्रभावित होगा, जहां पं. सूर्यनारायण व्यास की प्रतिमा स्थापित है. इसके बावजूद राजशेखर व्यास ने किसी प्रकार के मुआवजे की अपेक्षा किए बिना विकास कार्यों में सहयोग देने का निर्णय लिया है, जिसकी शहरभर में सराहना हो रही है.

भारती भवन में रुकते थे फ्रीडम फाइटर
वर्ष 2004 और 2016 के सिंहस्थ में भी पं. व्यास परिवार ने विकास कार्यों के लिए अपनी भूमि उपलब्ध कराई थी. अब सिंहस्थ-2028 में भी परिवार ने वही परंपरा निभाई है. उल्लेखनीय है कि महाकाल मंदिर परिसर स्थित यह आवास केवल एक मकान नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और उज्जैन के गौरवशाली इतिहास का साक्षी रहा है. कहा जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक क्रांतिकारी यहां पं. सूर्यनारायण व्यास से परामर्श लेने आते थे और यह स्थान अंग्रेजों की नजरों से बचने के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा.

दो मकान और बाधक बने
उधर, चौड़ीकरण में अभी भी दो संपत्तियां बाधा बनी हुई हैं. बड़े गणेश मंदिर के समीप स्थित पं. आनंदशंकर व्यास का भवन कानूनी प्रक्रिया में उलझा हुआ है, जबकि परचुरे भवन का मामला भी लंबित है. बताया जाता है कि परचुरे भवन के स्वामी गणेश परचुरे एक करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकार नहीं कर रहे हैं और मंदिर क्षेत्र में ही वैकल्पिक भवन की मांग पर अड़े हैं. इन दोनों मामलों के कारण सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूरी गति नहीं पकड़ पा रहा है.

व्यक्तित्व पर एक नजर
पद्मभूषण पं. सूर्यनारायण व्यास आधुनिक उज्जैन के शिल्पकार थे उनका जन्म 2 मार्च 1902 और निधन 22 जून 1976 को हुआ. विश्वविख्यात ज्योतिषाचार्य, खगोलविद, इतिहासकार, साहित्यकार, पत्रकार और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी वे रहे. विक्रम विश्वविद्यालय, विक्रम कीर्ति मंदिर और विक्रम द्विसहस्राब्दी महोत्सव के प्रमुख सूत्रधार, अखिल भारतीय कालिदास समारोह की शुरुआत कर उज्जैन को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान दिलाई।
महाकाल मंदिर के विकास में शंख द्वार, चांदी द्वार, मोजेक टाइल्स सहित अनेक कार्य करवाए. हजारों लेख, निबंध, व्यंग्य, यात्रा-वृत्तांत और ऐतिहासिक शोध प्रकाशित. 1958 में पद्मभूषण से सम्मानित, लेकिन 1967 में राजभाषा नीति के विरोध में सम्मान लौटा दिया. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनका आवास क्रांतिकारियों और राष्ट्रभक्तों का प्रमुख केंद्र रहा. सिंहस्थ 2004, 2016 और अब 2028 के विकास कार्यों में भी व्यास परिवार ने अपनी भूमि देकर शहरहित के मद्देनजर दान मे दी है

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