
शाजापुर, 11 जुलाई. शाजापुर नईसडक़ स्थित गेब शाह वली दरगाह को अप्रैल 2024 में शाजापुर कलेक्टर द्वारा शासकीय घोषित किया गया, लेकिन अगस्त 2024 में मप्र वक्फ बोर्ड में इसे वक्फ की जमीन के रूप में दर्ज कर लिया गया. याने कि कलेक्टर के आदेश के बाद जिला वक्फ कमेटी द्वारा इसे वक्फ में शामिल कराया गया. यह मामला हाईकोर्ट तक भी गया, लेकिन वहां इन्हें राहत नहीं मिली और इनका प्रकरण हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया. अब सवाल यह उठता है कि आखिर 14 अगस्त 2024 को वक्फ के रजिस्टर में की गई प्रविष्ठि किस सक्षम अधिकारी के आदेश अथवा स्वीकृति के आधार पर दर्ज की गई. जिला वक्फ की भूमिका की भी जांच होना चाहिए.
गौरतलब है कि नईसडक़ स्थित गेब शाह वली दरगाह की जमीन को पुलिस चौकी के लिए आरक्षित किया गया था, जिसे अप्रैल 2024 में शाजापुर कलेक्टर न्यायालय द्वारा सरकारी घोषित किया गया लेकिन 14 अगस्त 2024 को इस जमीन को मप्र वक्फ बोर्ड में शामिल कर लिया गया. बकायदा वक्फ बोर्ड के चेयरमेन सनवर पटेल ने इसे वक्फ में शामिल करने की अनुशंसा की थी. सनवर पटेल को हाल ही में भाजपा ने फिर वक्फ का चेयरमेन मनोनीत किया है. सवाल यह है कि इस प्रविष्ठि के समर्थन में कौन-कौन से मूल दस्तावेज, अधिसूचना, वक्फ डीड, सर्वे रिपोर्ट अथवा सक्षम अधिकारी का आदेश कौन सा था, जिसके आधार पर उक्त शासकीय भूमि को वक्फ के रजिस्टर में दर्ज किया गया.
क्या कार्यवाही होगी जिला वक्फ कमेटी पर…
जिस जमीन को अप्रैल 2024 में सरकारी घोषित किया गया, उसके चंद महीने बाद शाजापुर जिला वक्फ कमेटी द्वारा उक्त जमीन को वक्फ में कैसे शामिल कराया गया. यदि जिला प्रशासन ऐसी और जमीनों की पड़ताल करेगा, तो कई सरकारी जमीनें इसी प्रकार वक्फ में शामिल की गई है. जिला प्रशासन को अब जिला वक्फ कमेटी की संदिग्ध भूमिका की भी जांच करना चाहिए कि सरकारी जमीन वक्फ में किस आधार पर दर्ज की गई है और इसमें सरकारी अधिकारी-कर्मचारी की मिलीभगत वक्फ कमेटी के साथ तो नहीं है.
इन सवालों का जवाब कौन देगा…?
पहला प्रश्न 14 अगस्त 2024 को वक्फ रजिस्टर में की गई प्रविष्ठि किस सक्षम अधिकारी के आदेश से दर्ज की गई. दूसरा सवाल उस प्रविष्ठि के समर्थन में कौन सा मूल वैधानिक दस्तावेज अधिसूचना या अन्य रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई, जिसके आधार पर शासकीय भूमि को वक्फ रजिस्टर में शामिल किया गया. तीसरा सवाल प्रविष्ठि दर्ज करने से पूर्व क्या संबंधित राजस्व अभिलेखों, बंदोबस्त रिकॉर्ड, शासकीय दस्तावेजों और उपलब्ध वक्फ अभिलेखों का विधिवत परीक्षण एवं सत्यापन किया गया था. यदि इनका सत्यापन किया गया, तो इसका अभिलेखीय आधार क्या है. इन सब प्रश्नों के अलावा सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शाजापुर जिला वक्फ कमेटी की भूमिका या दावित्य था या नहीं. जिला वक्फ कमेटी द्वारा किस आधार पर संबंधित भूमि की स्थिति का परीक्षण किया और वक्फ में शामिल करने की अनुशंसा कर दी. शाजापुर शहर में ऐसे कई मामले उजागर हो सकते हैं जो शासकीय जमीन को वक्फ के अभिलेखों में कूटरचना के साथ दर्ज कराए गए हैं.
