इंदौर को अगले पांच वर्षों में बनाया जाएगा रेबीज मुक्त शहर

इंदौर: देश के कई शहरों में डॉग बाइट कुत्तों के काटने की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. इन घटनाओं से सबसे अधिक महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित होते हैं. डॉग बाइट के बाद रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा भी बना रहता है. इसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत प्रदेश के पांच शहरों में आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान और रेबीज की रोकथाम के लिए व्यापक वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा, ताकि अगले पांच वर्षों में इन शहरों को रेबीज मुक्त बनाया जा सके.

भारत सरकार ने मध्य प्रदेश के पांच शहरों—इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर—को इस पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया है. अभियान का उद्देश्य इन शहरों में रेबीज पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर भविष्य में पूरे देश को इस जानलेवा बीमारी से मुक्त बनाने के लिए एक सफल मॉडल तैयार करना है. इंदौर चिड़ियाघर प्रभारी एवं पशु विशेषज्ञ डॉ. उत्तम यादव ने बताया कि इंदौर में वर्ष 2013-14 से एबीसी (एनिमेल बर्थ कंट्रोल) कार्यक्रम के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी का कार्य किया जा रहा है. अब इसी अभियान को और प्रभावी बनाते हुए रेबीज उन्मूलन कार्यक्रम लागू किया गया है. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नसबंदी के साथ-साथ एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन भी अनिवार्य रूप से किया जा रहा है.

विशेष अभियान शुरू किया
डॉ. यादव के अनुसार, इंदौर में अब तक हजारों आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है और इसी दौरान उन्हें एंटी-रेबीज वैक्सीन भी लगाई गई है. स्वच्छता में देशभर में पहचान बना चुके इंदौर को अब रेबीज मुक्त शहर बनाने की दिशा में भी अग्रणी भूमिका दी गई है. उन्होंने बताया कि जुलाई माह से डब्ल्यूवीएसके और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) के सहयोग से विशेष अभियान शुरू किया गया है, जो 26 सितंबर तक चलेगा. यह अभियान अगले पांच वर्षों तक चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जाएगा.

पालतू कुत्तों के लिए सर्टिफिकेट होगा अनिवार्य
नगर निगम अब केवल आवारा कुत्तों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पालतू कुत्तों के पंजीयन और वैक्सीनेशन को भी अनिवार्य बनाएगा. अब पालतू कुत्तों के मालिकों को वैक्सीनेशन के बाद प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) बनवाना होगा.
जानकारी के अनुसार, इंदौर में फिलहाल केवल करीब 800 पालतू कुत्तों का ही पंजीयन हुआ है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक मानी जा रही है. कई लोग अपने पालतू कुत्तों का समय पर वैक्सीनेशन नहीं कराते और उनके स्वास्थ्य संबंधी देखभाल में भी लापरवाही बरतते हैं.

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई
नगर निगम ने ऐसे मामलों पर सख्ती बरतने का निर्णय लिया है. इसके लिए जोनल अधिकारियों और सहायक अधिकारियों को विशेष अधिकार दिए जाएंगे. सुबह के समय वे अपने-अपने क्षेत्रों में पालतू कुत्तों के वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र की जांच करेंगे. साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वाले पालतू कुत्तों के मालिकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई भी की जाएगी. नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित नस्ल ब्रीड के कुत्ते पाए जाने पर संबंधित मालिकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा.

अनियंत्रित ब्रीडिंग पर भी रहेगी नजर
रेबीज मुक्त अभियान के तहत नगर निगम कुत्तों की अनियंत्रित ब्रीडिंग पर भी निगरानी रखेगा. पालतू कुत्तों की बिक्री करने वाले दुकानदारों से भी पंजीयन संबंधी प्रपत्र भरवाए जाएंगे, ताकि अनावश्यक ब्रीडिंग पर रोक लगाई जा सके और आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित रहे.

महत्वपूण पहल साबित होगा अभियान
नगर निगम का मानना है कि नसबंदी, नियमित वैक्सीनेशन, पंजीयन और जनजागरूकता के माध्यम से इंदौर को निर्धारित पांच वर्षों में रेबीज मुक्त शहर बनाया जा सकेगा. यह अभियान न केवल रेबीज की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि डॉग बाइट की घटनाओं में कमी लाने और शहर में पशु एवं जनस्वास्थ्य के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा.

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