चेन्नई, (वार्ता) मद्रास उच्च न्यायालय ने द्रमुक के कद्दावर नेता एवं तमिलनाडु के पूर्व मंत्री ईवी वेलु के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर पर गुरुवार को रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति जी के इलंथिराययन ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय को निर्देश दिया कि वे 28 जुलाई तक वेलु के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न करें और प्राथमिकी और उसके बाद जारी लुक आउट सर्कुलर को रद्द करने की उनकी याचिका पर अपना जवाब (काउंटर) दाखिल करें।
न्यायालय ने यह रोक इस शर्त पर लगायी है कि वेलु को 15 जुलाई को पूछताछ के लिए जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा।
वेलु के वकील एवं राज्यसभा सदस्य पी विल्सन ने कहा, “लुक आउट सर्कुलर पर इस शर्त के साथ रोक लगायी गयी है कि याचिकाकर्ता 15 जुलाई को जांच अधिकारी के सामने पेश होंगे। प्रतिवादी को अपना जवाब दाखिल करना होगा।” उन्होंने कहा कि जांच आगे बढ़ सकती है लेकिन अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी तब तक (28 जुलाई ) याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठायेंगे।
सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय ने 2022 में एनजीओ ‘अराप्पोर इयक्कम’ की शिकायत के आधार पर वेलु और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शुरू होने से पहले ही एक कॉन्ट्रैक्टर को भुगतान कर दिया गया था, जिससे प्रोजेक्ट फंड के आवंटन में भ्रष्टाचार हुआ। राज्य सरकार से वेलु पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।
सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय ने दावा किया कि प्रथम दृष्टया ऐसे सबूत हैं जिनसे पता चलता है कि वेलु समेत आरोपियों ने आपराधिक साजिश रची थी, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। यह मामला भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। इस बीच इलाज के लिए सिंगापुर गये वेलु के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था।
