![]()
जबलपुर। कान्हा नेशनल पार्क में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस बाघों की संदिग्ध मौत की चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी है। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि वायरस की रोकथाम के लिए कान्हा नेशनल पार्क में के सीमावर्ती क्षेत्रों में दो हजार श्वानों को वैक्सीनेशन किया गया है। याचिका की सुनवाई के दौरान उठाए गए तीन मुद्दो पर हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस वी पी शर्मा की युगलपीठ ने केंद्र व राज्य सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की है।
मुम्बई के चेम्बूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में लगातार बाघों की मौत हो रही है। अप्रैल माह में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन सुनैना और बाघिन अमाही तथा उसके चार अर्धवयस्क शावक की मौत हो गयी। रिपोर्ट के अनुसार मौतों से पहले उनकी शारीरिक स्थिति में स्पष्ट गिरावट देखी गयी गयी। इन मौतों का कारण संदिग्ध कैनाइन डिस्टेंपर वायरस माना गया। एक और युवा नर बाघ महावीर की भी 19 मई 2026 को मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु का कारण संभावित कैनाइन डिस्टेंपर वायरस बताया गया है। इसी समय-सीमा के दौरान दो वयस्क नर बाघों की बालाघाट और किसली क्षेत्रों में मृत पाए गए। अकेले कान्हा टाइगर रिजर्व में ही एक महीने के समय में आठ बाघों की मौत हुई है।
याचिका में कहा गया था कि कान्हा टाइगर रिजर्व में प्रायः लुप्त रॉयल बंगाल टाइगर की आबादी की सुरक्षा करना है। इसके लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के द्वारा निर्धारित मापदंड निर्धारित किये गये है। नियमों का पालन नहीं किया जाने के कारण बाघों की मौत में इजाफा हुआ है। टाइगर रिजर्व के भीतर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघों की मृत्यु का सिलसिला वर्तमान जारी है। याचिका में राहत चाही गयी है कि निवारण और निगरानी संबंधी उपायों का पालन सुनिश्चित किया जाये।
पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने केंद्र व राज्य सरकार को निर्देशित है कि बाघों की सुरक्षा के लिए निवारक और उपचारात्मक उपायों करें। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के लिए डॉग को कोरेंटाइन व वैक्सीनेशन किया जाये। याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से उक्त जानकारी पेश की गयी।
याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि वायरस प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व मेें भी फैल सकता है। बाघों की सुरक्षा के लिए प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व के समीप श्वान का वैक्सीनेशन किया जाये। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय ने टाइगर रिजर्व में रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए नवम्बर 2025 में आदेष जारी किये थे। इसके बावजूद भी टाइगर रिजर्व में रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं हुई है। इसके अलावा टाइगर रिजर्व के लिए केन्द्र सरकार के द्वारा पर्याप्त फंड नहीं जारी करने का मुद्दा भी युगलपीठ के समक्ष उठाया गया। युगलपीठ ने तीनो मुद्दो पर केन्द्र व राज्य सरकार को जवाब पेष करने के निर्देश जारी किये है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंशुमान सिंह तथा अधिवक्ता प्रतीक रूसिया ने पैरवी की।
