वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तीखी आलोचना करते हुए इसे ‘न्याय का मजाक’ करार दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि दक्षिणी सीमा और मेक्सिको में ‘बर्थराइट सिटिजनशिप’ का प्रचार कर ‘बर्थ टूरिज्म’ का घोटाला चलाया जा रहा है, जिससे अवैध तरीके से अरबों डॉलर कमाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिकी नागरिकता बिकाऊ नहीं है और वह सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले पर तत्काल दोबारा सुनवाई की मांग करेंगे ताकि इस ‘बेतुके’ फैसले को बदला जा सके।
न्यायिक फैसले और संवैधानिक विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से 14वें संशोधन के तहत जन्मसिद्ध नागरिकता के सिद्धांत को बरकरार रखा है, जिसके अनुसार अमेरिका में जन्मे बच्चे, चाहे उनके माता-पिता की कानूनी स्थिति कुछ भी हो, अमेरिकी नागरिकता पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने ‘अमेरिका बनाम वोंग किम आर्क’ मामले के ऐतिहासिक फैसले को दोहराते हुए इसे संवैधानिक वादे का हिस्सा बताया। वहीं, ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि नागरिकता के लिए माता-पिता का अमेरिकी निवासी (डोमिसाइल) होना अनिवार्य शर्त होनी चाहिए, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
इमिग्रेशन नीति और चुनावी एजेंडा
यह न्यायिक फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अपने चुनाव अभियान के दौरान ‘बर्थ टूरिज़्म’ को समाप्त करने और इमिग्रेशन नीतियों को सख्त बनाने को अपना मुख्य एजेंडा बनाया था। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय को नहीं बदला गया, तो यह अमेरिका के लिए विनाशकारी साबित होगा। अब देखना यह है कि राष्ट्रपति के इस दबाव के बाद क्या सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी स्थिति की समीक्षा करता है या यह राजनीतिक खींचतान और लंबी चलेगी।

