सतना: पश्चिम मध्य रेलवे के अपर मंडल रेल प्रबंधक (एडीआरएम) दिनेश कुमार कमाले ने अपने त्रैमासिक निरीक्षण कार्यक्रम के तहत बुधवार को सतना रेलवे स्टेशन और उससे जुड़े विभिन्न जगहों का विस्तृत निरीक्षण किया। एडीआरएम एक दिन पहले ही सतना पहुंच गए थे। बुधवार सुबह करीब 9 बजे शुरू हुआ निरीक्षण दोपहर लगभग 2 बजे तक चला, जिसमें उन्होंने रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाओं, कर्मचारियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं तथा चल रहे विकास कार्यों का बारीकी से जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान एडीआरएम ने रेलवे लॉबी, रनिंग रूम, एआरएमई (एक्सीडेंट रिलीफ मेडिकल इक्विपमेंट) सहित विभिन्न महत्वपूर्ण इकाइयों का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली और आवश्यक सुधार एवं रखरखाव के संबंध में दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान स्टेशन परिसर की साफ-सफाई, कर्मचारियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं तथा सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
इसी कड़ी में निर्माणाधीन रनिंग रूम का निरीक्षण करते हुए एडीआरएम ने कार्य की प्रगति पर संतोष जताने के साथ ही ठेकेदार को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सबसे पहले बाउंड्री वॉल का निर्माण पूरा किया जाए, उसके बाद शेष निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश भी दिए।
वीआईपी रूम भी पहुंचे
इसके अलावा एडीआरएम ने प्लेटफॉर्म क्रमांक-1 स्थित वीआईपी रूम क्षेत्र का भी निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा स्टेशन परिसर में चल रहे विकास कार्यों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया। करीब पांच घंटे तक चले निरीक्षण के बाद एडीआरएम दिनेश कुमार कमाले महानगरी एक्सप्रेस से जबलपुर के लिए रवाना हो गए। उनके निरीक्षण को रेलवे प्रशासन द्वारा नियमित समीक्षा एवं व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
परिजनों ने साझा की समस्याएं
एडीआरएम ने रेल कर्मियों के परिजनों के साथ आमने सामने बैठ कर सीधा संवाद भी किया। इस दौरान रेल कर्मियों के परिवार के लोगों ने बताया कि रनिंग स्टाफ को कम करने में वर्तमान में कुछ जगहों पर परेशानी हो रही है । खास करके माल ट्रेन के चालक को जगह-जगह ट्रेन को रोक दिया जाता है । चालक के द्वारा ट्रेन चलाने की स्थिति में नहीं रहने के बावजूद भी ट्रेन चलाने की बात कही जाती है ।
उन्होंने बताया कि कभी-कभी मालगाड़ी के चालक को कई दिन तक बाहर रहना पड़ता है जिससे परिवार के लोगों के बीच कई प्रकार की समस्या खड़ी हो जाती है उन्होंने कहा कि ट्रेनों का परिचालन समय पर हो और जितनी घंटा ड्यूटी रेलवे के नियम के अनुसार तय किया गया है उतने ही घंटा ड्यूटी लिया जाए ताकि परिवार के बीच भी ऑन ड्यूटी रेलवे स्टाफ अपना समय गुजार सके । रनिंग स्टाफ को मानसिक तनाव से दूर रखना चाहिए ताकि ट्रेनों का परिचालन समुचित रूप से करने में चालक और अन्य रनिंग स्टाफ को मानसिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े ।
