54 वर्ष के हुए सौरव गांगुली, ‘महाराज’ से ‘दादा’ बनने तक का सफर; जानिए भारतीय क्रिकेट के नायक के अनसुने किस्से

कोलकाता, 8 जुलाई 1972 को कोलकाता में जन्मे सौरव गांगुली एक संपन्न कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते थे। बचपन से ही सुख-सुविधाओं के बीच पले-बढ़े होने के कारण उन्हें प्यार से ‘महाराज’ कहा जाता था। सेंट जेवियर्स कॉलेजिएट स्कूल से अपनी शिक्षा पूरी करने वाले गांगुली शुरुआत में फुटबॉल के प्रति अधिक आकर्षित थे, लेकिन अपने बड़े भाई स्नेहाशीष गांगुली के प्रोत्साहन से उन्होंने क्रिकेट को अपना करियर चुना। 1989 में बंगाल के लिए अपने डेब्यू के साथ ही उन्होंने अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवा लिया था।

क्रिकेट का सुनहरा दौर और ‘दादा’ का नाम

सौरव गांगुली ने अपनी आक्रामक कप्तानी और शानदार बल्लेबाजी से भारतीय क्रिकेट की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। जूनियर खिलाड़ियों को हमेशा प्रोत्साहित करने और उनके साथ भाई जैसा व्यवहार रखने के कारण पूरी टीम उन्हें सम्मान से ‘दादा’ पुकारने लगी। उनकी कप्तानी में भारत ने 2002 में ICC चैंपियंस ट्रॉफी जीती और 2003 के वर्ल्ड कप समेत कई टूर्नामेंट्स के फाइनल तक का सफर तय किया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से 2008 में संन्यास लेने के बाद, उन्होंने खेल के सभी प्रारूपों को 2012 में अलविदा कहा।

प्रशासनिक सफलता और नई भूमिकाएं

संन्यास के बाद भी गांगुली खेल से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। वे 2015 से 2019 तक क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष रहे और 2019 में उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वर्तमान में वे कमेंट्री और विशेषज्ञ विश्लेषण के माध्यम से क्रिकेट के प्रति अपना योगदान दे रहे हैं। व्यक्तिगत जीवन में डोना गांगुली के साथ उनका रिश्ता और उनके परिवार का निरंतर सहयोग उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण प्रेरणा रही है, जो आज भी लाखों फैंस के लिए एक आदर्श है।

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