नयी दिल्ली, 08 जुलाई (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इलाहाबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने झांसी के गरौठा विधानसभा सीट से पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रहे काले धन को वैध बनाने के मामले की जांच के सिलसिले में झांसी और लखनऊ में कई जगहों पर तलाशी ली है। यह जांच ईडी द्वारा दर्ज की गयी प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) पर आधारित है। यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सतर्कता संगठन द्वारा पूर्व विधायक के पास आय से अधिक संपत्ति होने के आरोपों को लेकर दर्ज प्राथमिकी के आधार पर तैयार की गयी थी।ईडी की शुरुआती जांच से पता चला है कि रियल एस्टेट, निर्माण और अन्य व्यवसायों में शामिल कंपनियों और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) के नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर अपराध से कमाई की गयी और उसे वैध किया गया।
इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विभिन्न अनुसूचित अपराधों से जुड़े आरोप भी शामिल हैं, और जांच में 23 से अधिक एफआईआर शामिल हैं। शुरुआती जांच में लगभग 60 आपराधिक मामलों का भी पता चला है, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली, हत्या की कोशिश और डकैती जैसे आरोप शामिल हैं। ये मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट और अन्य संबंधित कानूनों के तहत दर्ज किये गये हैं।
ईडी द्वारा आरोपी, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी संस्थाओं और व्यक्तियों के रिहायशी और व्यावसायिक परिसरों में तलाशी ली जा रही है। इसका मकसद अपराध से हुई कमाई, लाभकारी स्वामित्व, वित्तीय लेनदेन और कथित तौर पर अवैध स्रोतों से हासिल की गयी संपत्ति से जुड़े सबूत जुटाना है। ईडी तलाशी के दौरान अपराध से हुई कमाई का पता लगाने और उसे वैध करने में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और चल-अचल संपत्ति और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
इस मामले में आगे की जांच जारी है।

