गाजा, 06 जुलाई (वार्ता) गाजा में हमास के नेतृत्व वाली सरकारी आपातकालीन समिति तथा सरकारी कार्य अनुवर्ती समिति के प्रमुख मोहम्मद अब्दुल खालिक अल-फर्रा ने सोमवार को अपने पदों से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए गाजा का नियंत्रण राष्ट्रीय समिति को सौंपने की पूर्ण तैयारी की पुष्टि कर दी।
श्री अल-फर्रा के इस्तीफे के साथ-साथ सरकारी आपातकालीन समिति भी भंग हो गयी और गाजा का शासन राष्ट्रीय गाजा प्रशासन समिति के हाथों में आ गया, जिसका गठन अमेरिका की मध्यस्थता वाली शांति योजना के तहत हुआ है।
उन्होंने सोमवार को जारी आधिकारिक पत्र में कहा कि यह निर्णय फिलिस्तीनी जनता के सर्वोच्च हितों, नागरिकों की कठिनाइयों को कम करने तथा गाजा में जारी युद्ध, नाकेबंदी, सीमाई क्रॉसिंग बंद रहने और पुनर्निर्माण में हो रही देरी के मद्देनजर लिया गया है।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय समिति को प्रशासन सौंपने की प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। इसी के साथ उन्होंने सरकारी कार्य अनुवर्ती समिति और सरकारी आपातकालीन समिति के अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे की घोषणा की।
पत्र के अनुसार हमास के शासन के दौरान सरकारी तंत्र का हिस्सा रहे कर्मचारी अपने पदों पर केवल पेशेवर एवं तकनीकी स्तर पर कार्य जारी रखेंगे, ताकि प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी कोई शून्य उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था मिस्र के काहिरा में फिलिस्तीनी गुटों के बीच सहमत रोडमैप के अनुरूप होगी।
श्री अल-फर्रा ने कहा कि शेष सरकारी ढांचा अब ‘सरकारी सेवा प्रबंधन प्राधिकरण’ के नाम से कार्य करेगा और फिलिस्तीनी कानूनों एवं नियमों के अनुसार अपनी सेवाएं देता रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी राज्य के कर्मचारी हैं और जनता की सेवा के लिए पूरी क्षमता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने को तैयार हैं।
उन्होंने सभी पक्षों और मध्यस्थों से अपील की कि वे गाजा के प्रशासन के लिए गठित राष्ट्रीय समिति को तत्काल अपना कार्यभार संभालने और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन शुरू करने में सहयोग सुनिश्चित करें।
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्थापित शांति बोर्ड ने शासन भंग को संज्ञान में लेते हुए कहा, “हमने गाज़ा में “आपातकालीन समिति” को भंग करने के बारे में आज हुई घोषणा पर ध्यान दिया है। आखिरकार, गाज़ा के लोगों की अहम ज़रूरतों को पूरा करने के मामले में हमारा आकलन वादों के बजाय किये गये कामों पर आधारित होगा। गाज़ा में शासन, सुरक्षा और बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए योजना में बतायी गयी ज़रूरतों के हिसाब से फ़ैसले व्यापक होने चाहिये।”
दूसरी ओर, इस कदम पर इज़रायल की पहली प्रतिक्रिया में सरकारी प्रसारक कान ने एक अज्ञात अधिकारी का हवाला देते हुए इस्तीफ़े की घोषणा को “धोखा और बिना किसी व्यावहारिक महत्व वाला” बताया। उन्होंने आरोप लगाया, “हमास को डर है कि उसे समझौते का उल्लंघन करने वाला माना जायेगा, इसलिए वह मामले को टाल रहा है और धोखे का सहारा ले रहा है।”
