नयी दिल्ली, 3 जुलाई (वार्ता) निर्यात संगठनों के शीर्ष निकाय फियो ने देश के वार्षिक निर्यात को 2030 तक दो लाख करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंचाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सशक्त और उत्तरदायी निर्यात ऋण व्यवस्था आवश्यक के साथ साथ, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के विस्तार और हरित अर्थव्यवस्था को अपनाने में सहायक व्यवस्था पर बल दिया है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में शुक्रवार को यहां बोर्ड-ऑफ-ट्रेड (बीओटी) की बैठक में फियो की ओर से एक प्रस्तुति में कहा गया कि ” दो ट्रिलियन (दो लाख करोड़) अमेरिकी डॉलर के निर्यात वाली अर्थव्यवस्था बनने के भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक सशक्त, प्रभावी और त्वरित निर्यात ऋण प्रणाली अत्यंत आवश्यक होगी।”
गौरतलब है कि वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात (वस्तु एवं सेवा सहित) 863 अरब डॉलर के बराबर था जिसमें वस्तुओं का निर्यात करीब 442 अरब डॉलर का था। सरकार ने निर्यात क्षेत्र के समक्ष 2030 तक कुल निर्यात को सालाना दो हजार अरब डॉलर (दो लाख करोड़ डॉलर) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
फियो की ओर से बैठक में कहा गया कि निर्यात वृद्धि बनाए रखने के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के निर्यात ऋण के प्रवाह को सुधारने की जरूरत है जो हाल के दौर में कम हुआ है। संगठन ने कहा है कि प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के अंतर्गत दिए जाने वाले निर्यात ऋण में हाल के समय में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। निर्यात ऋण में लगभग 14 प्रतिशत की कमी आई है, जिसके कारण विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम से जुड़े निर्यातकों के सामने गंभीर तरलता का संकट उत्पन्न हो गया है जब कि एमएसएमई निर्यातक भारत के निर्यात क्षेत्र की रीढ़ माने जाते हैं।
वैश्विक हालात के बीच इस समय निर्यातकों को भुगतान प्राप्त होने में लग रहे अधिक समय का उल्लेख करते हुए फियो ने कहा है कि निर्यातकों को लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि, अनुपालन संबंधी बढ़ती आवश्यकताएँ तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में उन्हें समय पर और किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
फियो की प्रस्तुति में कहा गया है कि इन चुनौतियों का समाधान करना लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने तथा देश के महत्वाकांक्षी निर्यात लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। संगठन ने सरकार से अनुरोध है कि वह इस विषय को उच्च प्राथमिकता दे तथा बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय, नौवहन महानिदेशालय तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर ऐसा ढांचा विकसित करे जिससे माल ढुलाई से संबंधित शुल्कों में पारदर्शिता पारदर्शिता सुनिश्चित हो और शुल्क तर्कसंगत हों।
इसी संदर्भ में भारतीय निर्यात कार्गो के लिए कंटेनरों और जहाजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने , निर्यातकों और शिपिंग कंपनियों के बीच नियमित संवाद को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है।
फियो ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में ‘हरित व्यवसाय’ की ओर हो रहे परिवर्तनों के अनुरूप बदलाव के लिए भारतीय निर्यातकों का सहयोग किये जाने की अपील भी की है। संगठन का सुझाव है कि भारतीय निर्यातकों को वैश्विक हरित व्यापार व्यवस्था के अनुरूप बनाने के लिए वित्तीय सहायता, रियायती वित्त , प्रतिस्पर्धी तकनीकी हस्तांतरण ), कार्बन ऑडिट तथा ट्रेसेबिलिटी प्रणालियों के लिए सहयोग प्रदान किया जाना चाहिए।
ऐसी सहायता भारतीय निर्यातकों को बदलती वैश्विक व्यापार व्यवस्था के अनुरूप सफलतापूर्वक कार्य करने में सक्षम बनाएगी। आज हरित परिवर्तन में निवेश करना केवल मौजूदा निर्यात बाजारों की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि भारत को स्वस्थ विकास को महत्व देने वाली वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में प्राथमिक स्रोत के रूप में स्थापित करने के लिए भी आवश्यक है।
फियो ने पर्यटन और खुदरा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विदेशी पर्यटकों हेतु जीएसटी रिफंड व्यवस्था लागू करने की व्यवस्था बिना और विलंब के लागू करने की अवश्यकता पर भी बल दिया है। इस संदर्भ में संगठन ने इस बात का उल्लेख किया कि एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) अधिनियम, 2017 की धारा 15 के अंतर्गत भारत में वस्तुएँ खरीदने वाले विदेशी पर्यटकों को जीएसटी वापस करने का प्रावधान है। जीएसटी लागू हुए लगभग नौ वर्ष बीत जाने के बावजूद, यह महत्वपूर्ण प्रावधान अभी तक व्यवहार में लागू नहीं किया गया है।
फियो ने कहा है कि इस व्यवस्था को शीघ्र लागू करने से भारत में आने वाले विदेशी पर्यटकों को लाभ मिलेगा, पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, खुदरा व्यापार खुदरा निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा तथा भारत वैश्विक खरीदारी के रूप में और अधिक आकर्षक बन सकेगा।
