ईरान ने ओमान के तट से होकर होर्मुज पार करने वाले जहाजों की निगरानी के लिए विशेष सैनिक किये नियुक्त

तेहरान, 03 जुलाई (वार्ता) ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखने के लिए फारस की खाड़ी के तट पर विशेष बलों को तैनात किया है। इसके साथ ही ये जवान उन जहाजों की पहचान कर रहे हैं, जो ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की ओर से सुझाये गये दक्षिणी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह तैनाती ऐसे समय में की गयी है, जब ईरान इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

इस रास्ते के भविष्य के प्रबंधन को लेकर अभी ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है। सूत्रों का कहना है कि ईरान के ये सैनिक आधुनिक राडार, ड्रोन और तटीय चौकियों की मदद से उन जहाजों की पहचान पहले ही कर लेते हैं, जो ओमान वाले रास्ते से जाने की योजना बनाते हैं। इसके अलावा, ईरान ओमान में अपने गुप्त संपर्कों के जरिए जहाजों के आने-जाने के समय (शेड्यूल) की जानकारी भी पहले से जुटाने की कोशिश कर रहा है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान अपने बीच के तनाव को कम करने वाले समझौते को बचाये रखने की कोशिश में जुटे हैं। इस मामले को सुलझाने के लिए ओमान की मध्यस्थता में कतर की राजधानी दोहा में बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है, जहां समुद्री रास्तों की सुरक्षा और इसके प्रबंधन पर चर्चा होगी। इस बातचीत के बावजूद, ईरान उन जहाजों को रोकने की अपनी तैयारी मजबूत कर रहा है जो उसके बताये रास्तों से नहीं जा रहे। ईरान की सेना का साफ कहना है कि इस समुद्री क्षेत्र से केवल वही जहाज गुजर सकते हैं, जिन्हें ईरान मंजूरी देगा। उसने चेतावनी दी है कि कोई भी मालवाहक जहाज ओमान के तट वाले दक्षिणी रास्ते का इस्तेमाल न करे।

अभी हाल ही में 25 जून को ईरान की सेना ने ओमान के पास से गुजर रहे सिंगापुर के एक मालवाहक जहाज पर हमला कर दिया था, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा था। इस हमले के बाद अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसके बाद ईरान ने वहां मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किये। इस तनाव की वजह से इस समुद्री रास्ते पर व्यापार करने वाले जहाजों के लिए तीन अलग-अलग रास्ते बन गये हैं। 1968 से चला आ रहा पुराना और मुख्य रास्ता इस समय इस्तेमाल के लायक नहीं है क्योंकि युद्ध के दौरान वहां समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा दी गयी थीं। ईरान ने वादा किया है कि वह 30 दिनों में इन सुरंगों को साफ कर देगा।

यही वजह है कि इस समय ज्यादातर जहाज या तो ईरान के तट के पास वाले उत्तरी रास्ते से जा रहे हैं या फिर ओमान के पास वाले दक्षिणी रास्ते से। ईरान चाहता है कि सभी जहाज उसके बताए रास्ते से ही गुजरें। इस विवाद की मुख्य वजह इस समुद्री रास्ते पर मालिकाना हक को लेकर है। ईरान का दावा है कि इस रास्ते पर उसका और ओमान का संयुक्त अधिकार है। वह चाहता है कि 60 दिनों की अस्थायी अवधि खत्म होने के बाद दोनों देश मिलकर यहाँ से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क वसूलें।

ओमान ने हालांकि ईरान के इस प्रस्ताव से खुद को अलग कर लिया है। ओमान के विदेश मंत्री का कहना है कि भविष्य में जहाजों से कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका ने ईरान के इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है और इस पर कोई भी फैसला खाड़ी देशों और पूरी दुनिया की सहमति से ही होना चाहिए। ईरान के उप विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि अगर उनके साथ तालमेल नहीं बिठाया गया, तो वह इस रास्ते से जहाजों का आना-जाना पूरी तरह रोक सकते हैं और फिर सुरक्षित सफर की कोई गारंटी नहीं होगी। दो सप्ताह पहले हुए संघर्षविराम के बाद भी इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही सामान्य से बहुत कम है। युद्ध से पहले यहां से रोज 130 जहाज गुजरते थे, जो अब घटकर लगभग आधे रह गये हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के मुताबिक इस संकट में अब तक 14 नाविकों की जान जा चुकी है। इन चेतावनियों के बावजूद, कई जहाज अभी भी अमेरिकी सुरक्षा के भरोसे ओमान वाले रास्ते का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

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