
भोपाल। साइबर अपराधों के प्रति बच्चों और युवाओं को जागरूक बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस ने राज्यव्यापी ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में साइबर सुरक्षा शपथ कार्यक्रम आयोजित किया। स्कूल शिक्षा विभाग के समन्वय से आयोजित इस विशेष पहल में लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालयीन कर्मचारियों ने सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने का संकल्प लिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा तथा पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना के निर्देशन में संचालित इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश को साइबर अपराधों के प्रति अधिक सुरक्षित बनाना है। राजधानी भोपाल से लेकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक स्थित विद्यालयों में एक साथ साइबर सुरक्षा का संदेश दिया गया और इंटरनेट के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान डिजिटल दौर में बच्चे और किशोर इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग तथा विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग कर रहे हैं, जिससे वे साइबर ठगी, ऑनलाइन उत्पीड़न, फिशिंग लिंक और फर्जी सूचनाओं जैसे साइबर अपराधों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गए हैं। अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में यह समझ विकसित करना है कि डिजिटल दुनिया में हर क्लिक सोच-समझकर करना आवश्यक है।
साइबर शपथ के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने पासवर्ड, ओटीपी, बैंकिंग जानकारी एवं अन्य गोपनीय व्यक्तिगत सूचनाएं किसी अजनबी से साझा नहीं करने, सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करने, अपुष्ट जानकारी प्रसारित नहीं करने तथा ऑनलाइन गेमिंग और चैटिंग के दौरान सतर्क रहने का संकल्प लिया। साथ ही किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तत्काल अभिभावकों, शिक्षकों अथवा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर देने का भी संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने पहले ही सभी जिला शिक्षा अधिकारियों एवं विद्यालयों के प्राचार्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए थे। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को साइबर स्वच्छता, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और ऑनलाइन सतर्कता के मूलभूत सिद्धांतों की भी जानकारी दी।
मध्यप्रदेश पुलिस का मानना है कि विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाकर साइबर अपराधों की रोकथाम में दीर्घकालिक और प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। जागरूक विद्यार्थी न केवल स्वयं सुरक्षित रहेंगे, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
