अमेरिका ने एक भारतीय कंपनी सहित आठ लोगों और संस्थाओं पर लगाया प्रतिबंध

अमेरिका ने  एक भारतीय कंपनी सहित आठ लोगों और संस्थाओं पर लगाया प्रतिबंध

वाशिंगटन, 27 जून (वार्ता) अमेरिका ने सूडान में चल रहे गृहयुद्ध को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क से संबंध रखने का आरोप में आठ लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं जिनमें एक भारतीय कंपनी भी शामिल है। ये नेटवर्क सूडानी सशस्त्र बलों (एसएएफ ) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) दोनों के लिए हथियार खरीदने, लोगों की भर्ती करने और लॉजिस्टिकल सहयोग देने का काम करते हैं। अमेरिका के वित्त विभाग विभाग के अनुसार, ये नेटवर्क कई देशों में फैले हुए हैं और हथियार, विस्फोटक और विदेशी लड़ाकों की सप्लाई में शामिल हैं, जिससे दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक को बढ़ावा मिल रहा है।

अमेरिका के विदेश विभाग और वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय(ओएफएसी ) द्वारा घोषित इस कार्रवाई का मकसद उन नेटवर्क को रोकना है जिन्हें अधिकारियों ने ‘सूडान के युद्ध को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क’ बताया है। ये नेटवर्क एसएएफ और आरएएफ दोनों को हथियार, विस्फोटक और लोगों की आपूर्ति करते हैं। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, “सूडान में संघर्ष से फायदा उठाने वाले नेटवर्क उस मानवीय युद्धविराम की संभावनाओं को खतरे में डालते हैं जिसकी सूडान के लोगों को बहुत ज़्यादा ज़रूरत है।” अधिकारियों ने बताया कि ये प्रतिबंध कार्यकारी आदेश 14098 के तहत लगाए गए हैं। यह आदेश उन लोगों को निशाना बनाता है जो सूडान में अस्थिरता फैला रहे हैं और लोकतांत्रिक बदलाव की प्रक्रिया को कमजोर कर रहे हैं। ये प्रतिबंध दोनों पक्षों पर युद्धविराम के लिए सहमत होने का दबाव बनाने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा हैं। जिन लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें वे शामिल हैं जो विस्फोटक और सैन्य उपकरण आपूर्ति करने के काम से जुड़े हैं। ओएफएसी ने बताया कि सूडान की ‘टारगेट मल्टी एक्टिविटीज कंपनी लिमिटेड’ (टीएमएसी) (जो रक्षा उद्योग प्रणाली (डीआईएस) के नियंत्रण में है) ने भारत की ‘एसबीएल एनर्जी लिमिटेड’ से विस्फोटक मंगवाए थे।

वित्त विभाग ने कहा कि भारतीय नागरिक आलोक चौधरी की अगुवाई वाली एसबीएल ने सूडान से जुड़ी संस्थाओं को ‘2024 से अब तक विस्फोटक और उससे जुड़ी सामग्री की 200 से ज़्यादा खेप’ की आपूर्ति की हैं। वित्त विभाग ने कहा, “इन विस्फोटकों का इस्तेमाल बाद में एसएएफ द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बमों में किया जाता है।” इन प्रतिबंधों में सूडान की सरकारी औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स कंपनियां भी शामिल हैं, जैसे ‘पोर्ट्स इंजीनियरिंग कंपनी’। अधिकारियों के मुताबिक इस कंपनी ने संघर्ष के दौरान विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से पोषाक और सैन्य सामान मंगवाया था। साथ ही अमेरिका ने कोलंबिया के एक भर्ती नेटवर्क के सदस्यों को भी प्रतिबंधित किया है। इन पर सशस्त्र समूहों की ओर से सूडान में लड़ने के लिए पूर्व सैनिकों को भेजने का आरोप है। विदेश विभाग ने कहा कि वह ‘केमिकल एंड बायोलॉजिकल वेपन्स कंट्रोल एंड वॉरफेयर एलिमिनेशन एक्ट’ के तहत दूसरे दौर के उपाय भी लागू कर रहा है। इनमें निर्यात पर सख्त पाबंदियां और सूडान के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद का विरोध शामिल है। विदेश विभाग ने कहा, “ट्रंप प्रशासन सूडान में स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध है। हम संघर्षरत पक्षों से मानवीय आधार पर युद्धविराम पर सहमत होने और उसका पालन करने की अपील करते हैं।”

अधिकारियों ने बताया कि इन प्रतिबंधों के तहत प्रतिबंधित पक्षों की अमेरिका से जुड़ी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया जाएगा और अमेरिकी लोगों के साथ उनके लेन-देन पर रोक लगा दी जाएगी। साथ ही चेतावनी दी गई कि नियमों का उल्लंघन करने पर दीवानी या आपराधिक दंड लग सकती है। सूडान के सैन्य गुटों के बीच चल रहे संघर्ष ने 2023 से देश को तबाह कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे “दुनिया का सबसे खराब मानवीय संकट” करार दिया है और कहा है कि इसने चरमपंथी समूहों को इस इलाके में अपनी गतिविधियां बढ़ाने का मौका दिया है।

 

 

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