
बालाघाट, पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हसन हुसैन की शहादत का पर्व मोहर्रम 26 जून शुक्रवार को जिला मुख्यालय सहित देश व पूरी दुनिया में मनाया गया ।जहा पूरे दिन विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन किए गए। यौमे आशूरा के नाम से जाने जाने वाले इस खास दिन में मुस्लिम धर्मावलंबियों द्वारा आशूरा की विशेष नमाज मस्जिदों व घरों में अदा की गईं। इसके अलावा जगह जगह ताजिए निकालकर अखाड़े का आयोजन कर, जगह जगह लंगर ए आम, खिचड़ा, शरबत आदि तक्सीम कर शहीदाने कर्बला को याद किया गया।
जगह जगह विभिन्न कार्यक्रमो के हुए आयोजन
इस विशेष दिन पर प्रति वर्ष के अनुसार इस वर्ष भी यौमे आशूरा की पूर्व सन्धा पर विभिन्न कार्यक्रमों के जगह जगह आयोजन किए गए।जिसके उपरांत रात्रि में मुस्लिमो में शहरी कर रोजा रखा।शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगो ने आज के इस खास दिन में यौमे आशूरा का रोजा रख विशेष इबादत की।नगर की तमाम मस्जिदों में यौमे आशूरा की विशेष नमाज अदा कराई गई।वही सामुहिक दुवाओ का आयोजन किया गया।वही लोगो ने कब्रिस्तान पहुंचक़र अपने मरहुमीन और बुजुर्गो को याद किया। वही जगह-जगह लंगर खिचड़ा शरबत वितरण सहित अन्य कार्यक्रम संपन्न कराए गए,इसके आलावा घर घर- शरबद खिचड़ा का वितरण कर शहीदाने करबला को याद किया गया।बताया गया कि,इसी दिन हजरत ईमाम हुसैन की कर्बला में शहादत हुई थी।
इंसानियत को बचाने पेश की थी कुर्बानी
इस्लामिक साल के पहले माह मोहर्रम उर्दू की 10 तारीख को, पूरी दुनिया में यौमे अशुरा के रूप में मनाया जाता है। जिसमें विशेषकर हजरत इमाम हुसैन, उनका परिवार और उनके साथियों, जिन्होंने कर्बला के मैदान में धर्म और इंसानियत को बचाने के लिए अपनी कुर्बानी पेश की थी। जिनकी याद में यौमे अशुरा के दिन खिचड़ा लंगर और शरबत बांटा जाता है वही यतिमो व बेहसहारों की मदद की जाती है।ज्ञात हो कि माहे मोहर्रम की पहली तारीख से शहीदाने कर्बला की याद में मस्जिदों में मिलादो की महफिल, नात ख्वानी, लंगर आदि का आयोजन हजरत ईमाम हुसैन के चाहने वालों द्वारा किया जाता है।इसके अलावा यही आयोजन नगर के विभिन्न चौक चौराहो व मार्गो में देखने को मिला।
मस्जिदों मे बताई गईं दास्ताने कर्बला
मोहर्रम माह के एक तारीख से लेकर 10 तारीख तक शहर की जामा मस्जिद में ईमाम द्वारा धर्मावलंबियों को शहीदाने कर्बला और हजरत ईमाम हुसैन की जीवनी से जुड़ी तकरीर दी गईं।जहां आज यौमे आशुरा पर विशेष तौर पर शहीदाने कर्बला पर विशेष तकरीर, विशेष नमाजे आदि की जानकरिया दीं गईं। नगर की विभिन्न मस्जिदो में इमाम हुसैन की शहादत पढ़ी गई। देश में अमन-चैन व खुशहाली की कामना करते हुए पीड़ित लोगों की सेवा का संदेश दिया। जहां इमाम द्वारा शहीदाने करबला की जीवनी से प्रेरणा लेने, उनके बताए मार्ग पर चलने,झूठ फरेब से बचने, ज्यादा से ज्यादा गरीबों की मदद करने, सदका खैरात करने और ईमान की राह पर चलने की नसीहते दीं गईं.
बनाए गए ताजिए
देखा जाये तो मोहर्रम पर्व पर जिले भर में ताजिया बनाने की वर्षो पुरानी परंपरा चली आ रही है। मोहर्रम पर्व पर ताजिया के रूप में हिन्दू-मुस्लिम कौमी एकता की अनूठी मिसाल भी पेश होती हैं, जो आज भी कायम है।मोहर्रम पर्व पर मन्नती ताजिया बनाने का क्रम इस बार भी जारी रहा जहाँ अकीदतों के ताजिये को तैयार कर उन्हें ठड़ा किया गया.
त्यौहारो को लेकर पुलिस ने बढाई सुरक्षा व्यवस्था
यौमे आशूरा पर्व व पर्व विशेष पर आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के लेकर नगर में सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम देखने को मिले।जहां मुस्लिम बाहुल्य इलाकों सहित विभिन्न चौक चौराहो व मार्गो में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस कर्मचारी मुस्तेद रहे।जहा शांति पूर्ण तरिके से हर साल की तरह इस साल भी यह पर्व सम्पन्न किया गया।
