नई दिल्ली। सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी संस्थाओं की भूमिका बढ़ाने के लिए आयोजित सम्मेलन में वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण, बाजार समर्थन और संस्थागत विकास जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) ने सहकारी क्षेत्र के विस्तार और बदलाव के लिए अपने सुझाव साझा किए।
सम्मेलन में देश की उन पंचायतों में नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS), डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के गठन पर जोर दिया गया, जहां अभी इनकी मौजूदगी नहीं है। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से कृषि अवसंरचना विकसित करने और पैक्स को नए व्यवसायों से जोड़ने पर भी चर्चा हुई।
राज्यों ने पैक्स द्वारा किए जा रहे विभिन्न व्यावसायिक कार्यों, सफल मॉडलों और विविधीकरण की संभावनाओं को साझा किया। विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक आधारित, पारदर्शी और पेशेवर प्रबंधन वाली पैक्स ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत आर्थिक संस्थान बन सकती हैं।
सम्मेलन में नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं जैसे National Cooperative Exports Limited, National Cooperative Organics Limited और Bharatiya Beej Sahakari Samiti Limited के माध्यम से निर्यात, जैविक उत्पादों और बीज क्षेत्र में सहकारी मॉडल को बढ़ावा देने पर भी मंथन हुआ।
डिजिटल बदलाव, डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को भी प्राथमिकता दी गई। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छह माह के लक्ष्य तय करने को कहा गया।
सम्मेलन में सहकारिता आंदोलन को गति देने और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए राष्ट्रीय संस्थाओं और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया गया।
