
सिंगरौली। धान खरीदी में करीब एक करोड़ रुपये की हेराफेरी से जुड़े बहुचर्चित मामले में न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश महेंद्र पाल सिंह ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी बरका समिति प्रबंधक को 10 साल का कठोर कारावास एवं 50 लाख रूपये जुर्माना अर्थदंड से दंडित किया है। पुलिस की प्रभावी विवेचना और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के आधार पर यह फैसला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार आरोपी उदयपाल सिंह पिता मंगल सिंह उम्र 64 वर्ष निवासी ग्राम पिपरा चौकी बरका, थाना सरई वर्ष 2023-24 के दौरान आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित बरका में समिति प्रबंधक के पद पर पदस्थ था। वह खरीदी केंद्र क्रमांक-1 बरका एवं खरीदी केंद्र क्रमांक-2 पिपरी का खरीदी प्रभारी भी था। लोकसेवक के रूप में कार्य करते हुए उसने 1 दिसंबर 2023 से 19 जनवरी 2024 के बीच खरीदे गए धान 4434720 क्विंटल धान में से 4594.20 क्विंटल धान शासन के भंडारण में जमा नहीं किया तथा उसकी कीमत 1 करोड़ 29 हजार 138 रुपये 60 पैसे का आपराधिक न्यासभंग किया। आरोप है कि उसने शासन के साथ छल करते हुए उक्त राशि का दुरुपयोग किया तथा अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र भी रचा।
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50 लाख रुपए अर्थदंड सहित कई धाराओं में दोषसिद्ध
मामले में थाना सरई में धारा 420, 409 एवं 120-बी भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया था। विवेचना तत्कालीन चौकी प्रभारी सासन एवं उपनिरीक्षक संदीप नामदेव द्वारा की गई। जांच के दौरान दस्तावेजी, तकनीकी एवं मौखिक साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय में मजबूत अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। प्रकरण की पैरवी एजीपी एमके त्रिपाठी द्वारा की गई। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर महेंद्र पाल सिंह अपर सत्र न्यायाधीश देवसर ने 24 जून को फैसला सुनाते हुए आरोपी उदयपाल सिंह को दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी को धारा 409 आईपीसी में 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 50 लाख रुपये अर्थदंड, धारा 420 आईपीसी में 5 वर्ष का कारावास एवं 1 लाख रुपये अर्थदंड तथा धारा 120-बी आईपीसी में 3 वर्ष का कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। एसपी शियाज केएम एवं एएसपी सर्वप्रिय सिन्हा के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई को आर्थिक अपराधों के विरुद्ध बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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