बागियों का संसदीय भविष्य तय होने के बाद होगा मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार

प्रवेश कुमार मिश्र नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा , यह तो स्पष्ट नहीं हो सका है लेकिन इस विस्तार में देरी क्यों हो रही है , उसको लेकर कहा जा रहा है कि यह देरी किसी प्रशासनिक कारण से नहीं, बल्कि संसद के भीतर दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा सुरक्षित करने की एक सोची-समझी रणनीतिक कवायद है. सूत्रों कि माने तो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों के विद्रोह और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के 9 में से 6 सांसदों के पाला बदलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष द्वारा दलबदल और विलय पर दिए जाने वाले अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है. ताकि संविधान की 10वीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून के तहत इनकी सदस्यता पर स्थिति स्पष्ट हो जाए. कहा जा रहा है कि जैसे ही लोकसभा अध्यक्ष की ओर से इन दलबदलुओं को कानूनी हरी झंडी मिलेगी, मोदी मंत्रिमंडल का नया गठबंधन-2.0 स्वरूप देश के सामने होगा.

सूत्र बता रहे हैं कि यदि सब कुछ राजग रणनीतिकारों की रणनीति के अनुसार हुआ तो मंत्रिमंडल में टीएमसी के बागी सांसदों व शिंदे गुट के सांसदों में से कुछ महत्वपूर्ण नेताओं को स्थान दिया जा सकता है. चर्चा है कि राजग के सत्ता फॉर्मूले के अनुसार, टीएमसी के बागी गुट यानी एनसीपीआई को केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक कैबिनेट और एक या दो राज्यमंत्री का पद मिलने की प्रबल संभावना है. बागी गुट की मुख्य सूत्रधार और लोकसभा में टीएमसी की चीफ व्हिप रहीं काकोली घोष दस्तीदार कैबिनेट मंत्री पद की सबसे बड़ी दावेदार हैं. उनके राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उन्हें स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, या सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे जा सकते हैं. इसके बाद राज्यमंत्री के तौर पर अरूप रॉय तथा सौम्य चटर्जी को मंत्रिमंडल में शामिल कर पश्चिम बंगाल के क्षेत्रीय समीकरणों विशेषकर उत्तर या दक्षिण बंगाल को साधने का प्रयास किया जाएगा.

इसी तरह  6 नए सांसदों के आने से लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो जाएगी. इस आधार पर इस गुट को भी मंत्रिपरिषद में एक अतिरिक्त कैबिनेट मंत्री की सीट मिल सकती है. सूत्रों कि माने तो जदयू को उसके कोटे के हिसाब से मंत्रिमंडल में स्थान मिल चुका है लेकिन बिहार में नीतीश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भाजपा द्वारा केन्द्रीय मंत्रिमंडल में एक कैबिनेट मंत्री का स्थान देने की बात हुई थी ऐसे में इस विस्तार में जदयू अध्यक्ष संजय कुमार झा को कैबिनेट में स्थान मिल सकता है. कहा जा रहा है कि बिहार से संबंध रखने वाले एक कैबिनेट मंत्री की छुट्टी हो सकती है. राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल समाप्त होने के बाद जार्ज कुरियन व रवनीत सिंह बिट्टू तथा उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी व दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा को नई जिम्मेदारी मिलने के कारण यानी उक्त चारों की मंत्रिमंडल से विदाई तय है. इसके अलावा आधा दर्जन कैबिनेट मंत्री और आधा राज्यमंत्री की विदाई तय मानी जा रही है. इतना ही नहीं रिपोर्टकार्ड के आधार पर एक दर्जन मंत्रियों का विभाग परिवर्तन भी किए जाने की चर्चा है.

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