
ब्यावरा। सुठालिया वन क्षेत्र में सागौन तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम पर वन माफिया ने हमला कर दिया. तस्करों ने पहले फायरिंग की, फिर कुल्हाड़ी, गोफन, पत्थर और कांच की बोतलों से अमले को निशाना बनाया. हमले में डिप्टी रेंजर समेत तीन वनकर्मी घायल हुए है, जबकि दो सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया. घटना मंगलवार देर रात नारबे की पहाड़ी क्षेत्र में होना बताई गई है.
वन विभाग के डिप्टी रेंजर दिनेश नागर को सूचना मिली थी कि लटेरी क्षेत्र से उकावद मार्ग के रास्ते मोटरसाइकिलों पर अवैध रूप से सागौन की लकडियां ले जाई जा रही है. सूचना के आधार पर डिप्टी रेंजर, चौकी प्रभारी अर्जुन शर्मा और अन्य कर्मचारियों की सात सदस्यीय टीम ने नारबे की पहाड़ी के पास घेराबंदी की. कार्रवाई के दौरान वन अमले ने तस्करों को जैसे ही रोक तो टीम को देखकर तस्कर मोटरसाइकिल और सागौन की लकडियां छोडक़र जंगल की ओर भाग गए. मौके से करीब आठ मोटरसाइकिल और 70 से 80 सागौन की सिल्लियां बरामद की गईं.
हमले में डिप्टी रेंजर सहित 3 घायल
हमले में डिप्टी रेंजर दिनेश नागर, वनरक्षक संदीप नागर और यशवंत नायक घायल हुए हैं. तीनों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है. वन विभाग के अनुसार किसी को गंभीर चोट नहीं आई है. प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि जब्त सागौन की लकड़ी सुठालिया क्षेत्र में खपाने की तैयारी थी. इस संबंध में एक फर्नीचर इकाई की भूमिका की भी जांच की जा रही है. डिप्टी रेंजर दिनेश नागर ने बताया कि जो वनकर्मी घायल हुए हैं, वे पथराव में घायल हुए हैं. वहीं गांववालों का कहना है कि आत्मरक्षा में वन विभाग की ओर से भी फायरिंग की गई थी.
16 नामजद और अन्य लोगों के खिलाफ केस
घटना के बाद वन विभाग की शिकायत पर सुठालिया थाने में करीब 16 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है. वहीं जब्त लकड़ी को ग्रामीणों की मदद से ट्रैक्टर के जरिए सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. हालांकि यह पहली बार इतने बड़े स्तर पर तस्करों के हौंसले नजर आए है. इसके पूर्व भी वन विभाग तस्करों के विरूद्ध सागौन की खेप पकड़ चुका है. अधिकांश मामलों में तस्कर माल छोडक़र भाग जाते है. लेकिन इस बार अप्रत्याशित तरीके से तस्करों ने हमला बोला है. इससे वन विभाग भी अब गंभीरता से ले रहा है. सागौन कीमती इमारती लकड़ी है और सुठालिया के वनक्षेत्रों में इसका अच्छा उत्पादन होता है. ऐसे में तस्कर अब इस क्षेत्र को अपना गढ़ बना रहे है और मंगलवार को होने वाला हमला उस गढ़ को बचाने की मुहिम माना जा रहा है.
पलटकर हमला करने आए तस्कर
तस्करी रोकने गए वनकर्मियों ने पहले तो तस्करों को वहां से खदेड़ दिया. सके बाद वनकर्मी जब जब्ती की कार्रवाई कर रहे थे, तभी बड़ी संख्या में तस्कर हथियारों के साथ दोबारा लौट आए. क्योंकि वनकर्मीं जब्ती की कार्यवाही में लगे थे उस दौरान आरोप है कि तस्करों ने वन विभाग की टीम पर फायरिंग की और फिर कुल्हाड़ी, लाठी, पत्थर और कांच की बोतलों से हमला कर दिया. हमलावरों ने सरकारी वाहनों के टायर काट दिए और पत्थर मारकर उनके कांच भी तोड़ दिए. करीब आधे घंटे तक चले संघर्ष के बाद तस्कर जंगल के रास्ते फरार हो गए.
