गुना: जिले से सटे सिंगवासा चक में लंबे समय से बिजली न होने के चलते ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, जिनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं, कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।महिलाओं का गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दे दी कि जब तक हमारे गांव में बिजली नहीं आएगी, हम अपने बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में ही डेरा डाले रहेंगे।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में नियमित बिजली सप्लाई नहीं है। कभी-कभार एग्रीकल्चर लाइन से कुछ देर के लिए लाइट मिल जाती थी, लेकिन अब उसमें भी तकनीकी बाधाएं आ रही हैं। बारिश का मौसम सिर पर है, ऐसे में बिजली न होने से गांव में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बेहद बढ़ गया है। अंधेरे के कारण ग्रामीण रात-रात भर जागने को मजबूर हैं। बिजली के साथ-साथ गांव में पीने के पानी का भी गंभीर संकट है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में नल का पानी साफ नहीं आता है। मजबूरन लोग बोरवेल का पानी पी रहे हैं, जिसमें से केंचुए निकल रहे हैं।
इस दूषित पानी और बदहाली से करीब 500 से ज्यादा लोगों की आबादी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार अधिकारियों को आवेदन सौंप चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनकी प्रमुख मांग है कि बस्ती में जल्द से जल्द बीपीएल कोटे से एक नई डीपी रखवाई जाए ताकि उन्हें स्थाई बिजली मिल सके। कलेक्ट्रेट के बाहर भारी हंगामे और नारेबाजी के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने एक बार फिर ग्रामीणों को जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने का आश्वासन देकर वापस भेजा है। हालांकि, ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अगर इस बार भी सिर्फ कागजी आश्वासन मिला, तो वे बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगे।
