
नयी दिल्ली 23 जून (वार्ता) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। श्री रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए भारत के आर्थिक हितों से समझौता करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर दो दिवसीय भारत दौरे पर राष्ट्रीय राजधानी में हैं। उन्होंने दावा किया कि गत छह फरवरी को भारत और अमेरिका के बीच जारी संयुक्त बयान के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का वादा किया था, जबकि भारत ने अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम करने तथा पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक की खरीद का आश्वासन दिया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप की रेसिप्रोकल टैरिफ नीति को अवैध करार दे दिया, जिससे भारत को दी गई टैरिफ रियायत प्रभावी रूप से समाप्त हो गई। इसके बाद अमेरिका ने भारत सहित सभी व्यापारिक साझेदारों पर अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया और अब भारत अमेरिकी जांच के दायरे में है। कांग्रेस नेता का आरोप है कि अमेरिका इस जांच का इस्तेमाल भारत पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है ताकि वह प्रस्तावित ट्रेड डील पर हस्ताक्षर कर दे। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के लिए “सौदा नहीं बल्कि लूट” साबित होगा और इससे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के किसान गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।
श्री रमेश ने कहा कि जापान और यूरोपीय संघ के साथ समझौते के बावजूद अमेरिका ने उन पर भी टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। ऐसे में भारत को किसी भी ऐसे व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए, जो उसके राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हो। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को मलेशिया से सीख लेनी चाहिए, जिसने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका के साथ अपनी ट्रेड डील को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे पर भी चुप्पी साधने का आरोप लगाया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार कहा है कि उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” रुकवाया था। श्री रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस दावे का सार्वजनिक रूप से खंडन करना चाहिए।
