पाकिस्तान में ‘बलूचिस्तान की शेरनी’ नाम से मशहूर एक्टिविस्ट महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा सुनाई है। एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने यह फैसला 2024 की ग्वादर रैली मामले में सुनाया है।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा में स्थित एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने ‘बलूचिस्तान की शेरनी’ के नाम से मशहूर चर्चित बलूच एक्टिविस्ट महरंग बलोच को उम्रकैद की सख्त सजा सुनाई है। यह फैसला साल 2024 में ग्वादर में हुई एक रैली के दौरान एक सिक्योरिटी अफसर की मौत के गंभीर मामले में सुनाया गया है। इस फैसले के बाद पूरे पाकिस्तान और बलूचिस्तान में भारी बवाल और विरोध प्रदर्शनों का एक नया दौर शुरू हो गया है।
महरंग बलोच के साथ-साथ ‘बलूच यकजेहती कमेटी’ (BYC) के एक और बड़े नेता सिबगतुल्लाह शाह को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। एंटी-टेररिज्म कोर्ट क्वेटा-1 के जज मुहम्मद अली मोबिन ने सोमवार को यह अहम फैसला सुनाया। यह फैसला उस समय आया जब महरंग बलोच और दूसरे BYC नेताओं ने कोर्ट की पूरी कार्रवाई का कड़ा बॉयकॉट कर रखा था। 12 जून से गिरफ्तार किए गए ये सभी BYC नेता कानूनी कार्रवाई के विरोध में क्वेटा जेल के अंदर ही अपना धरना दे रहे हैं।
ग्वादर विरोध प्रदर्शन का मामला
बीबीसी उर्दू के अनुसार यह पूरा मामला जुलाई 2024 में ग्वादर में BYC द्वारा आयोजित बलूच राजी माची सभा से जुड़ा हुआ है। इस सभा के दौरान एक सिक्योरिटी अफसर की मौत हो गई थी जिसके बाद यह कार्यक्रम धरने में बदल गया था। इस बड़ी सभा में सिर्फ बलूचिस्तान के लोग ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान और ईरान के बलूच लोग भी शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान बलूचिस्तान के कई जिलों में धरने आयोजित किए गए थे जिससे भारी बवाल मच गया था।
फैसले पर बीवाईसी की कड़ी निंदा
महरंग बलोच की ‘बलूच यकजेहती कमेटी’ ने इस उम्रकैद की सजा की कड़ी निंदा की है। संगठन ने इस अदालती फैसले को पाकिस्तान के बलूच देश के खिलाफ नफरत का इजहार बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस केस का कोई कानूनी आधार नहीं था और यह सरकार की तानाशाही के बराबर है। संगठन के अनुसार इस फैसले ने विरोध और संघर्ष के एक नए ऐतिहासिक दौर की शुरुआत कर दी है।
शांतिपूर्ण एक्टिविज्म को दबाने का आरोप
बीवाईसी ने पाकिस्तान के संस्थानों पर आरोप लगाया कि वे शांतिपूर्ण बलूच राजनीतिक एक्टिविज्म को दबा रहे हैं। उन्होंने अपना आंदोलन आगे भी जारी रखने की बात कही और कहा कि जेल इस बड़े आंदोलन को नहीं रोक सकती है। महरंग बलोच की बहन नादिया बलूच ने भी कोर्ट के इस कड़े फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे बिना पहचान वाली कोर्ट का फैसला बताया क्योंकि लीगल टीम ने 12 जून से बॉयकॉट किया हुआ था।
महरंग पर चल रहे कई अन्य मामले
सरकार ने बॉयकॉट के दौरान आरोपियों का केस लड़ने के लिए अपनी तरफ से कुछ वकील नियुक्त किए थे। लेकिन महरंग बलोच और दूसरे BYC नेताओं ने उन सरकारी वकीलों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था। ग्वादर केस के अलावा सर्जन से एक्टिविस्ट बनीं महरंग बलोच पर कई और क्रिमिनल केस भी चल रहे हैं। हिरासत के दौरान उनके और दूसरे BYC सदस्यों के खिलाफ तीन लोगों की मौत सहित कई और मामले दर्ज हुए हैं।
