
नयी दिल्ली, 21 जून (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी क्षेत्रीय कार्यालय (गोवा) ने रविवार को बताया कि उसने सालगांवकर समूह और उसके सहयोगियों (जिन्हें सामूहिक रूप से एवीएस समूह कहा जाता है) से जुड़े बड़े स्तर के अवैध लौह अयस्क खनन मामले में 1,023.85 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की हैं। कुर्क की गयी संपत्तियों में भारत स्थित 459.10 करोड़ रुपये मूल्य की 99 अचल संपत्तियां, सिंगापुर में 471.32 करोड़ रुपये मूल्य की 31 अचल संपत्तियां और भारतीय कंपनियों में 93.42 करोड़ रुपये मूल्य के इक्विटी शेयर शामिल हैं। ये संपत्तियां दिवंगत अनिल वासुदेव सालगांवकर की संपत्ति (देखभाल के लिए नियुक्त की गयी लक्ष्मी अनिल सालगांवकर के माध्यम से), सालगांवकर माइनिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, शांतिलाल खुशालदास एंड ब्रदर्स प्राइवेट लिमिटेड, एस. कांतिलाल एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, सालिथो ओर्स प्राइवेट लिमिटेड, वर्टेक्स न्यूटन प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और सुवर्णरेखा पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं।
ईडी ने इस मामले की जांच गोवा की सीआईडी क्राइम ब्रांच के भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (एमएमडीआर अधिनियम) के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। ईडी के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने 21 अप्रैल 2014 और सात फरवरी 2018 के अपने फैसलों में यह माना था कि गोवा में 22 नवंबर 2007 के बाद और नये खनन पट्टे जारी होने तक की गयी सभी खनन गतिविधियां अवैध और बिना किसी कानूनी अधिकार के थीं। ईडी की जांच में सामने आया कि एवीएस समूह ने वर्ष 2007 से 2012 के बीच 10 खनन पट्टों का संचालन किया। समूह ने लौह अयस्क के अवैध निष्कर्षण, बिक्री और निर्यात के जरिये 2,492.95 करोड़ रुपये का काला धन जुटाया। एजेंसी के मुताबिक, अवैध रूप से निकाले गये अयस्क को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत शेल कंपनियों या स्पेशल पर्पज ह्वीकलों (एसपीवी) को बेहद कम कीमतों पर निर्यात किया गया था। इन कंपनियों ने सिर्फ बिचौलिये का काम किया। इन्होंने इस अयस्क को वापस चीन को बेच दिया। इससे अनुमानित 2,744.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त विदेशी व्यापार मुनाफा कमाया। मामले में अपराध की कुल कमाई लगभग 5,237.84 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। ईडी ने आरोप लगाया कि इन पैसों को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और सिंगापुर स्थित एसपीवी के जरिये घुमाया गया। फिर इनका इस्तेमाल विदेशों में बड़ी चल-अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। इस रकम का एक हिस्सा शेयर पूंजी के बहाने वापस भारत भी लाया गया था।
