सौसर:सौसर विकास खंड की बहुचर्चित पंचायत रामाकोना एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। वित्तीय अनियमितता और गबन के मामले में घिरीं सरपंच श्वेता गगन गोहेल के खिलाफ जिला पंचायत सीईओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें ‘मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम’ की धारा 92 (5) के तहत आगामी 6 वर्षों के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित कर दिया है। इस आदेश के बाद अब श्वेता गोहेल न तो कोई चुनाव लड़ पाएंगी और न ही किसी जनप्रतिनिधि पद पर आसीन हो सकेंगी।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद जागा प्रशासन:
मामले में दिलचस्प मोड़ तब आया जब हाईकोर्ट के पिछले आदेशों के बावजूद जिला पंचायत सीईओ द्वारा सरपंच के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। इससे नाराज होकर याचिकाकर्ता संतोष चौधरी ने दोबारा हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर दी। मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने सीईओ सहित अन्य आला अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया था। कोर्ट की इस सख्त रुख और तय समय-सीमा के निर्देश के बाद ही प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में यह बड़ी कार्रवाई की।
क्या है पूरा मामला:
उल्लेखनीय है कि सरपंच श्वेता गगन गोहेल, तत्कालीन पंचायत सचिव एवं अन्य पर सरकारी राशि की हेराफेरी (गबन) का दोष सिद्ध हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने उनसे गबन की गई राशि वसूलने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद सरपंच द्वारा राशि जमा न करते हुए बार-बार नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था और टालमटोल की नीति अपनाई जा रही थी।
अब चुना जाएगा स्थानापन्न सरपंच:
सीईओ द्वारा सरपंच को पद से हटाए जाने और उन्हें अयोग्य घोषित किए जाने का आदेश पारित होने के बाद अब रामाकोना पंचायत की कमान सौंपने का रास्ता साफ हो गया है। नियमानुसार,अब पंचायत में जल्द ही नया स्थानापन्न सरपंच चुने जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
