ई-रक्षक ऐप से खुला चोरी का राज, बुलेट चोर गैंग का शातिर पकड़ाया

इंदौर: पुलिस ने अंतर्राज्यीय बुलेट चोर गिरोह के एक शातिर सदस्य को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है. आरोपी जाली नंबर प्लेट लगाकर चोरी की बुलेट से शहर में घूम रहा था, जिसे ई-रक्षक ऐप की मदद से पकड़ लिया. पुलिस ने उसकी निशानदेही पर करीब 40 लाख रुपए कीमत की 14 चोरी की गाड़ियां बरामद की हैं.
डीसीपी जोन 3 अभिषेक रंजन ने बताया कि 19 जून की रात रेसकोर्स रोड स्थित बास्केटबॉल ग्राउंड के पास गश्त के दौरान एक युवक पुलिस को देखकर बुलेट लेकर भागने लगा. घेराबंदी कर पकड़े गए आरोपी ने अपना नाम कन्हैयाल लाहौर उम्र 40 साल निवासी भवानीमंडी, जिला झालावाड़ (राजस्थान) हाल मुकाम सुखलिया इंदौर बताया.

उसकी बुलेट हंटर 350 पर लगी नंबर प्लेट एमपी 09 वीव्हाय 2544 फर्जी निकली. ई-रक्षक ऐप से चेसिस और इंजन नंबर चेक करने पर असली नंबर एमपी 09डीडब्ल्यू 3840 सामने आया, जिस पर तुकोगंज थाने में चोरी का वाहन निकला. पूछताछ में आरोपी ने 31 मई की रात 56 दुकान क्षेत्र से बुलेट चोरी करना कबूल किया. उसने बताया कि वह पुलिस से बचने के लिए जाली नंबर प्लेट लगाता था और मास्टर चाबियों के गुच्छे से पार्किंग, सूने स्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से महंगी बुलेट व अन्य दोपहिया वाहन चुराता था. आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने विमल अपार्टमेंट, डॉल्फिन अस्पताल के पास पार्किंग और वल्लभ नगर मंदिर क्षेत्र से 10 बुलेट और 1 हीरो एचएफ डीलक्स मोटरसाइकिल बरामद की.

इसके अलावा दो बुलेट वाहन इंदौर से चोरी कर आगर मालवा जिले के सोयत कला में बेचना भी सामने आया, जिन्हें वहां की पुलिस ने जब्त कर लिया है, इस तरह आरोपी से 14 वाहन बरामद हुए हैं. आरोपी ने हीरानगर, विजयनगर, एमजी रोड, संयोगितागंज, खजराना, एरोड्रम, तुकोगंज और उज्जैन में वाहन चोरी करना स्वीकार किया है. उसके खिलाफ आगर मालवा के बड़ौद और कोटा सिटी (राजस्थान) में भी मामले दर्ज हैं.पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 12 मास्टर चाबियां, जाली नंबर प्लेट, हेलमेट और बैग भी जब्त किया है. फिलहाल आरोपी को रिमांड पर लेकर अन्य वारदातों के संबंध में पूछताछ की जा रही है, जिसमें और खुलासे होने की संभावना है. कार्रवाई डीसीपी अभिषेक रंजन, एडिशनल डीसीपी ओमप्रकाश और एसीपी विनोद कुमार दीक्षित के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी जितेंद्र चौहान के नेतृत्व में की गई.

ऐसे करता था वाहन चोरी...
आरोपी बेहद शातिर तरीके से वाहन चोरी की वारदातों को अंजाम देता था. वह पहले शहर के सूने स्थानों, पार्किंग और भीड़भाड़ वाले इलाकों की रेकी करता था. मौका मिलते ही मास्टर चाबियों के गुच्छे से बुलेट और अन्य दोपहिया वाहनों का लॉक खोल लेता था. चोरी के बाद पहचान छिपाने के लिए तुरंत जाली नंबर प्लेट लगा देता था और उसी वाहन से शहर में घूमता रहता था. पुलिस से बचने के लिए वह अलग-अलग इलाकों में वारदात करता था और चोरी की गाड़ियों को इधर-उधर खड़ा कर देता था या दूसरे जिलों में ले जाकर बेच देता था।

इनकी रही अहम भूमिका
डीसीपी अभिषेक रंजन ने बताया कि इस कार्रवाई में थाना प्रभारी लसूडिया के नेतृत्व में टीम ने काम किया. टीम में उपनिरीक्षक शिवराज सिंह ठाकुर, प्रधान आरक्षक विजेंद्र सिंह सोलंकी, सीआई सेल प्रधान आरक्षक देवेन्द्र सिंह जादौन, प्रधान आरक्षक राजीव यादव, आरक्षक राहुल जाट, आरक्षक निर्मल सिंह बघेल, आरक्षक सुनील मालवीय, साइबर सेल जोन 3 के आरक्षक अमित एवं आरक्षक विकास बच्छानिया शामिल रहे, जिन्होंने संयुक्त रूप से काम करते हुए 48 घंटे में मामले का खुलासा किया

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