नई दिल्ली | नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ‘राज्य वित्त 2024-25’ रिपोर्ट ने देश के राज्यों की आर्थिक स्थिति का आईना दिखाया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश, गुजरात और झारखंड समेत 13 राज्यों ने बजट में मुनाफा दर्ज किया है। वहीं, बिहार, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे 15 राज्य मुनाफे का लक्ष्य रखने के बावजूद भारी घाटे की स्थिति में रहे हैं।
विकास कार्यों और कर्ज का बोझ
रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही कुछ राज्यों ने रोजमर्रा के खर्चों में बेहतर प्रबंधन किया हो, लेकिन विकास कार्यों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर अत्यधिक खर्च के कारण सभी 28 राज्य राजकोषीय घाटे में हैं। 31 मार्च 2025 तक राज्यों पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 90.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, और 18 राज्यों ने वित्त आयोग द्वारा तय घाटे की सीमा को भी पार कर लिया है।
कमाई का बड़ा हिस्सा वेतन और ब्याज में
राज्यों की कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब भी अनिवार्य खर्चों में जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, राज्यों की कुल कमाई का 43 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में ही खर्च हो रहा है। नगालैंड में यह खर्च सबसे अधिक 74 प्रतिशत दर्ज किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि राज्यों के पास अब विकास के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखना बड़ी चुनौती है।

