नयी दिल्ली, 16 जून (वार्ता) भारत और जापान ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र (जेसीएम) के कार्यान्वयन नियमों को अपनाया है, जिससे भारत में कम कार्बन प्रौद्योगिकी आधारित परियोजनाओं में निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। आधिकारिक बयान के अनुसार दोनों देशों की सरकारों ने गत आठ जून को संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र के ‘रूल ऑफ इम्प्लीमेंटेशन’ को अपना लिया है जिसके लिए पिछले वर्ष भारत और जापान के बीच परस्पर सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किये गये थे। इस समझौते के तहत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी या उसके निष्कासन से संबंधित गतिविधियों में सहयोग के लिए एक रूपरेखा तैयार की गयी थी, जिससे भारत में सतत विकास को बढ़ावा देने के साथ दोनों देशों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।
कार्यांवयन नियमों में मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था का प्रावधान है जिसके तहत दोनों देशों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त समिति का गठन, परियोजनाओं के अनुमोदन की पारदर्शी प्रक्रिया, स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से सत्यापन और प्रमाणीकरण, सतत विकास से जुड़े सुरक्षा उपाय तथा कार्बन क्रेडिट के निर्गमन और हस्तांतरण पर नजर रखने के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों की व्यवस्था शामिल है। पर्यावरण मंत्रालय के इस संबंध में जारी बयान में कहा गया है कि संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे भारत में कम कार्बन प्रौद्योगिकी आधारित परियोजनाओं के लिए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन शमन और सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

