
छतरपुर। मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (हाउसिंग बोर्ड) के छतरपुर विभाग में पदस्थ संभागीय लेखा अधिकारी बी.पी. विश्वकर्मा को सागर लोकायुक्त की विशेष टीम ने सोमवार को 4 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छतरपुर निवासी रामनारायण शुक्ला ने 26 मई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय सागर में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि उन्होंने लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व छत्रसाल नगर स्थित अमलतास हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी के दो मकान खरीदे थे। एक मकान उनके बड़े भाई तथा दूसरा छोटे भाई के नाम पर था। दोनों मकानों की रजिस्ट्री संबंधी प्रक्रिया हाउसिंग बोर्ड कार्यालय से पूरी की जानी थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वह पिछले डेढ़ वर्ष से रजिस्ट्री की कार्रवाई पूरी कराने के लिए कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन संभागीय लेखा अधिकारी बी.पी. विश्वकर्मा बिना रिश्वत लिए फाइल आगे बढ़ाने को तैयार नहीं थे। अधिकारी द्वारा दोनों मकानों की रजिस्ट्री कराने के एवज में 6 हजार रुपये की मांग की गई थी। बाद में यह राशि 4 हजार रुपये में तय हुई।
शिकायत प्राप्त होने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन कराया। जांच के दौरान रिश्वत की मांग की पुष्टि होने पर सागर लोकायुक्त की निरीक्षक मंजू किरण तिर्की के नेतृत्व में विशेष ट्रैप दल का गठन किया गया।
पूर्व निर्धारित योजना के तहत सोमवार को शिकायतकर्ता रामनारायण शुक्ला केमिकल लगे 4 हजार रुपये लेकर हाउसिंग बोर्ड कार्यालय पहुंचे। जैसे ही उन्होंने आरोपी अधिकारी को राशि सौंपी और अधिकारी ने नोट अपनी जेब में रखे, उसी समय संकेत मिलते ही पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने कार्यालय में दबिश देकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया। हाथ धुलवाने पर केमिकल की प्रतिक्रिया से उनके हाथ गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।
लोकायुक्त निरीक्षक मंजू किरण तिर्की ने बताया कि शिकायत के सत्यापन में रिश्वत की मांग सही पाई गई थी। इसके आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी को 4 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही हाउसिंग बोर्ड कार्यालय के संबंधित दस्तावेजों, कंप्यूटर डेटा और फाइलों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
इस कार्रवाई से सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की सक्रियता एक बार फिर सामने आई है।
