
नीमच। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाले फर्जीवाड़े का खुलासा जयपुर में परिवहन विभाग की जांच के दौरान हुआ। वहां दिल्ली रोड खोले के हनुमान स्थित गोविंद वाटिका क्षेत्र में एक अवैध बस बॉडी बिल्डिंग यूनिट पर औचक कार्रवाई की। यहां दो बसें निर्माणाधीन मिली जिनका नीमच आरटीओ ने बिना सत्यापन के 15 दिन पहले ही रजिस्ट्रेशन जारी कर दिया था।
मामले में जयपुर आरटीओ ने बस बॉडी बिल्डिंग यूनिट संचालक, बस संचालक एवं पंजीयन अधिकारी के खिलाफ एफआईआर के आदेश जारी किए। नीमच आरटीओ नियमानुसार ही रजिस्ट्रेशन जारी करने का दावा कर रहे हैं।
जयपुर आरटीओ (प्रथम) की टीम ने जब वहां आमेर रोड स्थित एक अवैध बस बॉडी बिल्डिंग यूनिट पर औचक निरीक्षण किया दंग रह गए। बस बॉडी बिल्डिंग यूनिट का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं पाया गया। इसका संचालक मुबीन पिता यासीन है।
यहां दो बसें अवैध रूप से निर्माणाधीन पाई गईं। अधिकारी उनके दस्तावेज देखकर हैरान रह गए। बनने से पहले ही रजिस्ट्रेशन नीमच आरटीओ से 15 दिन पहले हो चुका था। इसके बाद बसों को एमपी 44 जेडजी 9565 और एमपी 44 जेडजी 9465 नंबर जारी किया। बसें कभी मप्र पहुंची ही नहीं। यानी बिना बस के अस्तित्व में आए ही कागजों पर रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किए।
बस का फ्रंट ग्लास टूटने के कारण वह रिपेयरिंग के लिए गई थी। नियमानुसार और ऑनलाइन सत्यापन के बाद ही रजिस्ट्रेशन किया गया है। मप्र में सीट टैक्स मात्र 200 रुपए है, जबकि राजस्थान में यह करीब 700 रुपए है।
– नंदलाल गामड़, आरटीओ, नीमच
