नैनीताल, 11 जून (वार्ता) विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम के स्थापना दिवस एवं बाबा नीम करौली महाराज जन्मोत्सव मेले को लेकर नैनीताल जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। आगामी 15 जून को आयोजित होने वाले मेले के मद्देनजर 13 जून से 16 जून तक विशेष यातायात योजना लागू रहेगी। इस दौरान श्रद्धालुओं को कैंची धाम पहुंचने के लिए शटल सेवाओं का उपयोग करना होगा।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बताया कि श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए इस वर्ष यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया गया है। मेले के दौरान किसी भी श्रद्धालु को निजी वाहन से सीधे कैंची धाम मंदिर तक जाने की अनुमति नहीं होगी। सभी श्रद्धालुओं को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर वाहन खड़े करने के बाद शटल सेवा के माध्यम से मंदिर तक पहुंचना होगा।
पुलिस के अनुसार हल्द्वानी, काठगोदाम और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भीमताल के विकास भवन पार्किंग के साथ अन्य पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं। यहां से कैंची धाम तक विशेष शटल सेवाओं का संचालन किया जाएगा। वहीं रामनगर और नैनीताल क्षेत्र से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मेट्रोपोल पार्किंग और डीएसए ग्राउंड पार्किंग निर्धारित की गई हैं। हल्द्वानी बस स्टेशन, हल्द्वानी रेलवे स्टेशन और काठगोदाम रेलवे स्टेशन से भी विशेष बस और मिनी बस सेवाएं संचालित की जाएंगी।
मेले के दौरान यातायात दबाव को कम करने के लिए 13 से 16 जून तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहनों को छोड़कर अन्य मालवाहक वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इन वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। टनकपुर मार्ग से बागेश्वर और पिथौरागढ़ तथा रामनगर मार्ग से अल्मोड़ा की ओर यातायात संचालित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस, सशस्त्र सीमा बल, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), फायर सर्विस, बम निरोधक दस्ता और एटीएस की तैनाती की जाएगी। पुलिस मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराया गया है। मेले के दौरान करीब 1500 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात रहेंगे।
एसएसपी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा से पहले जारी यातायात योजना की जानकारी अवश्य लें और प्रशासन द्वारा निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन करते हुए शटल सेवा का उपयोग करें, जिससे मेले का आयोजन सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सके।
