
मंदसौर। जल संरक्षण और प्राचीन जल स्रोतों के पुनर्जीवन के उद्देश्य से संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के तृतीय चरण के अंतर्गत नागदेवता की ऐतिहासिक बावड़ी के संरक्षण, स्वच्छता एवं सौंदर्यीकरण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक जन अभियान परिषद की जिला समन्वयक तृप्ति बैरागी के निर्देशन में 5 जून से 30 जून तक आयोजित किए जा रहे बावड़ी उत्सव के तहत संपन्न हुई।
बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि 9 जून से प्रतिदिन प्रातः 8 बजे से 9 बजे तक नागदेवता की बावड़ी पर नियमित श्रमदान किया जाएगा। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता, वार्डवासी, युवाजन एवं मातृशक्ति मिलकर बावड़ी की सफाई, गाद निकालने, आसपास के क्षेत्र की स्वच्छता तथा सौंदर्यीकरण के कार्यों में सहयोग करेंगे।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि नागदेवता की बावड़ी केवल एक जल स्रोत नहीं बल्कि मंदसौर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। वर्षों पूर्व नगर में जल संकट की स्थिति बनने पर इसी बावड़ी से पानी उपलब्ध कराकर शहरवासियों की प्यास बुझाई गई थी। यह बावड़ी शहर के इतिहास, जल प्रबंधन और सामाजिक जीवन की महत्वपूर्ण पहचान रही है। ऐसे ऐतिहासिक जल स्रोतों का संरक्षण वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि समय के साथ उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण बावड़ी का स्वरूप प्रभावित हुआ है। अब जनभागीदारी के माध्यम से इसे पुनः स्वच्छ, सुरक्षित और संरक्षित बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही बावड़ी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने तथा इसके मूल स्वरूप को संरक्षित रखने के लिए भी जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
बैठक में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने अधिक से अधिक नागरिकों को अभियान से जोड़ने तथा जल संरक्षण के प्रति जनचेतना बढ़ाने का संकल्प लिया। उन्होंने शहरवासियों, युवाओं, मातृशक्ति, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे प्रतिदिन श्रमदान में शामिल होकर इस जन-अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें।
बैठक में ब्लॉक समन्वयक अर्चना भट्ट, वार्ड पार्षद सुनीता भावसार, सामाजिक कार्यकर्ता विनय दुबेला, नवांकुर संस्था के प्रतिनिधि दिनेश सोलंकी, वरिष्ठ पत्रकार सुधीर शर्मा, क्षेत्र की मातृशक्ति एवं बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित रहे।
कार्यकर्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहयोग और सामूहिक प्रयासों से नागदेवता की ऐतिहासिक बावड़ी पुनः अपनी प्राचीन गरिमा प्राप्त करेगी तथा जल संरक्षण का प्रेरणास्रोत बनेगी।