नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी बॉन्ड्स से होने वाली कमाई पर इनकम टैक्स को समाप्त कर दिया है। ईरान और अन्य वैश्विक तनावों के कारण उत्पन्न आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच, यह निर्णय विदेशी पूंजी को भारतीय बाजार की ओर आकर्षित करने और अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है।
टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव
इस फैसले के तहत, विदेशी निवेशकों को अब 12.5% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं चुकाना होगा। पहले विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड्स पर भारी विदहोल्डिंग टैक्स का सामना करना पड़ता था, जिससे उनके निवेश पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ गया था। अब इस नए अध्यादेश के माध्यम से सरकार ने उन्हें बड़ी राहत दी है, जिससे भारतीय प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ने की संभावना है। यह कदम बाजार में तरलता बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगा।
बाजार पर सकारात्मक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीतिगत बदलाव से भारतीय शेयर और सर्राफा बाजार में नई चमक देखने को मिलेगी। विदेशी फंड्स के निरंतर प्रवाह से वैश्विक स्तर पर रुपये की स्थिति भी और अधिक मजबूत और स्थिर होगी। साथ ही, यह ऐतिहासिक कदम निवेशकों का भरोसा जीतने और भारतीय बाजार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध होगा। आने वाले समय में इसका सीधा और सकारात्मक लाभ देश के छोटे-बड़े सभी निवेशकों को मिलने की पूरी उम्मीद है।

