वाशिंगटन, 03 जून (वार्ता) अमेरिका ने जबरन श्रम के जरिए तैयार किये गये सामानों के व्यापार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए 60 देशों पर नये आयात शुल्क लगाने की चेतावनी दी है। अमेरिका का कहना है कि यदि इन देशों ने सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो उन सभी पर नए आयात शुल्क लगाए जाएंगे। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के कार्यालय ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत अपनी जांच पूरी कर ली है। जांच में पाया गया कि इन 60 अर्थव्यवस्थाओं में से प्रत्येक देश जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाने या उस प्रतिबंध को ठीक से लागू करने में विफल रहा है। इस प्रथा की वजह से अमेरिकी श्रमिकों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमिसन ग्रीर ने कहा, “जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को रोकने में हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारों की विफलता अस्वीकार्य है। इससे एक ऐसी स्थिति पैदा होती है जहां अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर एक असमान माहौल में प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।” अमेरिका ने इस व्यापक कार्रवाई में ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान और यूरोपीय संघ (ईयू) सहित अपने कुछ सबसे करीबी सहयोगियों के नाम भी शामिल किए हैं। अमेरिका का कहना है कि इसका मकसद अमेरिकी श्रमिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है। इस सूची में शामिल देशों के नाम देखने पर इसमें अमेरिकी सहयोगियों और प्रतिद्वंद्वियों, दोनों की लंबी फेहरिस्त नजर आती है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, इजराइल, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के नाम चीन, रूस, वेनेजुएला और वियतनाम के साथ रखे गए हैं। यूरोपीय संघ, कनाडा और मैक्सिको का नाम भी इसमें शामिल किया गया है।
प्रस्तावित कार्रवाई के तहत, जिन देशों ने कम से कम कानूनन या अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के माध्यम से जबरन श्रम से निर्मित सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाने की प्रतिबद्धता जताई है, उन्हें सभी सामानों पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा। अन्य सभी देशों को 12.5 प्रतिशत के और भी कड़े आयात शुल्क का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, एक अलग तंत्र के जरिए कुछ देशों से सीमित मात्रा में वस्त्र आयात को कम दर पर आने की अनुमति दी जाएगी। श्री ग्रीर ने स्वीकार किया कि कुछ भागीदारों ने शुरुआती प्रगति की है। उन्होंने कहा, “कुछ व्यापारिक भागीदारों ने जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को रोकने के लिए शुरुआती कदम उठाए हैं। लेकिन हमारे प्रत्येक व्यापारिक भागीदार को अभी और अधिक प्रयास करने होंगे।”
यह जांच पहली बार 12 मार्च 2026 को शुरू की गई थी। यूएसटीआर ने बताया कि अपने निष्कर्षों पर पहुंचने से पहले उसने लगभग 60 गवाहों के बयान दर्ज किए और 500 से अधिक सार्वजनिक टिप्पणियां प्राप्त कीं। एजेंसी ने अब सात जुलाई को होने वाली सुनवाई से पहले प्रस्तावित आयात शुल्क पर आगे और सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं, जिससे व्यवसायों, सरकारों और समर्थक समूहों को शुल्क लागू होने से पहले अपना पक्ष रखने के लिए एक छोटा सा अवसर मिलेगा। यह कदम ट्रम्प प्रशासन द्वारा की जा रही आक्रामक व्यापारिक कार्रवाइयों की श्रृंखला में नवीनतम है। प्रशासन ने लगातार आयात शुल्क को केवल आर्थिक हथियारों के रूप में नहीं, बल्कि एक नैतिक दबाव के साधन के रूप में पेश किया है। इसका उद्देश्य व्यापारिक भागीदारों को अमेरिकी श्रम मानकों की बराबरी करने या सीमा पर इसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर करना है। प्रभावित सरकारों ने अभी तक इस घोषणा पर औपचारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस सूची का दायरा इतना बड़ा है कि इसमें हर महाद्वीप शामिल है और अमेरिका के कुछ सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार भी इसके दायरे में आ गए हैं, जिससे यह तय है कि इसके राजनयिक परिणाम काफी बड़े होंगे।

