ग्वालियर: श्री दादाजी धाम धर्मपुरी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास जगतगुरु स्वामी रामेश्वरानंद महाराज ने हरिनाम सिमरन के महत्व का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि हरिनाम का निरंतर स्मरण मनुष्य को जीते-जी मुक्ति प्रदान कर सकता है।पूज्य महाराज ने कहा कि जिस प्रकार जीवित रहने के लिए श्वास आवश्यक है, उसी प्रकार जीवन को सार्थक बनाने के लिए भगवान के नाम का निरंतर स्मरण भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि हरिनाम संकीर्तन से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा सभी प्रकार के भय और कष्ट दूर हो जाते हैं। शास्त्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “नाम संकीर्तनम यस्य, सर्व पाप प्रणाशनम्” अर्थात भगवान के नाम का संकीर्तन सभी पापों का नाश करने वाला है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त धन का सदुपयोग दीन-दुखियों की सेवा और समाज कल्याण के कार्यों में किया जाना चाहिए। कथा के उपरांत मुख्य यजमान राधाकृष्ण कारड़ा एवं श्रीमती संगीता कारड़ा ने श्रीमद्भागवत की आरती की। इसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर मंदिर में विराजमान श्री बांके बिहारी को वृंदावन की विशेष पोशाक धारण कराकर आकर्षक एवं मनमोहक श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम में श्री दादाजी धाम सत्संग सेवा समिति के पदाधिकारी एवं सदस्यगण सहित बड़ी संख्या में भक्त श्रद्धालु उपस्थित रहे।
