सतना:विन्ध्य की प्रतिष्ठित व्यापारिक संस्था विन्ध्य चेम्बर आफ कामर्स के दो वार्षिक चुनाव की गतिविधियों ने जोर पकडना शुरू कर दिया है.सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए रात में होने वाली पार्टियों का दौर चालू हो गया है.बताया गया है कि जून महीने के अन्तिम सप्ताह में मतदान कराए जाने को लेकर चेम्बर का एक धड़ा सहमत हो गया है.उल्लेखनीय है कि वर्षेां पहले शहर में चेम्बर के अध्यक्ष को जो सम्मान मिला करता था.
उसकी तुलना सांसद,विधायक से की जाती थी.धीरे-धीरे चेम्बर की गतिविधियों में बढ़ते राजनेताओं और राजनैतिक दलों के प्रभाव के चलते न सिर्फ प्रतिष्ठा धूमिल हुई बल्कि चेम्बर पदाधिकारियों के आपसी विवाद शहर में व्यापारियों व आम जनों के बीच चर्चा का विषय बन गए.चेम्बर का शहर की जनता और व्यापारियों के लिए धारदार रूख भी भोथरा हो गया.हांलाकि चेम्बर के पूर्व अध्यक्षों ने कई बार उसकी कम होती प्रतिष्ठा पर एकजुटता का संदेश देते हुए पदाधिकारियों से परम्परा विरोधी काम नहीं करने की सलाह दी.
पूर्व अध्यक्षों की सलाह को कभी तत्कालिन कार्यकारिणी ने ज्यादा महत्व नहीं दिया.इससे शहर में उसका मान घटते-घटते व्यापारिक संस्था तक सीमित रह गया.
फिलहाल एक बार फिर चेम्बर चुनाव के लिए लडाकों का मंच सजने लगा है.सूत्रों की बातों को अगर सही माना जाए तो इस बार वर्तमान अध्यक्ष समेत चार लोग चुनाव मैदान में अपने पैनल के साथ उतने का मन बना रहे हैं.लोगों का कहना है कि जिस प्रकार से चेम्बर का राजनैतिककरण हो गया है उसमें बहुत मुश्किल है कि व्यापारियों के हितों के संरक्षण की बात करने वाले प्रतिनिधि चुनकर सामने आ सके.
जो नाम चर्चा में हैं उनमें समाजों के प्रतिनिधि के रूप में उन्हे गिना जा रहा है.वर्तमान अध्यक्ष सतीश सुखेजा की पुन: दावेदारी सिन्धी समाज के प्रतिनिधि के तौर पर देखी जा रही है.इसके अलावा इसी समाज के मनोहर डिगवानी भी चुनाव मैदान में उतने का मन बना चुके हैं.पिछले कुछ वर्षों से नेत्रदान व देहदान की गतिविधियों से जुडकर श्री गिडवानी ने समाज के अन्दर और बाहर अच्छी पकड़ बनाई है.इसके अलावा वर्तमान मंत्री संदीप जैन ने भी इस बार अध्यक्ष का चुनाव लडने का मन बना है.उन्हेाने अपनी दावेदारी तय करने के पहले चेम्बर के कुछ पूर्व पदाधिकारियों से अपनी दावेदारी को लेकर सहमति प्राप्त कर ली है.
इसके अलावा चौथे प्रत्याशी के रूप में व्यवसायी अशोक अग्रवाल भी मैदान में उतरने के लिए अपने समीकरण बना रहे हैं.ऐसा कहा जा रहा है उन्हे चेम्बर के कुछ पूर्व अध्यक्षों का खुला समर्थन मिल चुका है.उनका प्रयास है कि समाज के नाम पर बंटे व्यापारियों को एकजुट कर चुनाव की फिजा को एक बार फिर राजनीति के परकोटे से बाहर निकालकर व्यापारियों के हितों तक केन्द्रित किया जाए.अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि अन्य पदों के लिए कौन किस पैनल से चुनाव मैदान में आ सकता है.पर यह अभी से स्पष्ट हो गया है कि इस बार राजनैतिक पृष्टभूमि के व्यक्ति को चुनाव में दिक्कत आ सकती है.
