सतना: विंध्य क्षेत्र के गौरव कहे जाने वाले सतना रेलवे स्टेशन की तस्वीर इन दिनों धुंधली पड़ गई है।वल्ड क्लास स्टेशन का सपना दिखाने वालों की भी स्थिति यह है कि वे भी प्लेटफॉर्म के बाहर पांच मिनट खड़े नही रह सकते.यात्रियों के विश्राम गृह पर बाहरी लोगों का कब्जा और बाहर अवैध पार्किंग और होटल एजेंटों की मनमानी न भूलने वाला दृश्य पैदा करती है.
रेलवे स्टेशन न केवल जिले की पहचान है बल्कि विंध्य क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। लेकिन वर्तमान में यहाँ की अव्यवस्थाएं यात्रियों के लिए जी का जंजाल बन चुकी हैं। मूलभूत सुविधाओं की कमी प्रबन्धन पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
स्टेशन के मुख्य द्वार पर यात्रियों के स्वागत के लिए बनाया गया आकर्षक फव्वारा और जलकुंड अब बदहाली का शिकार हो चुका है। कुंड में भरा पानी सड़कर हरा हो गया है, जिससे उठने वाली बदबू ने यात्रियों का निकलना मुश्किल कर दिया है। जलकुंड में प्लास्टिक की बोतलें, थैलियां और कचरा तैर रहा है। जो स्थान कभी शहर की सुंदरता बढ़ाता था, वह अब मच्छरों और गंदगी का केंद्र बन गया है।
यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए वेटिंग रूम में अब यात्री कम बाहरी लोग अधिक नजर आते हैं। सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण कई लोग यहा रात भर डेरा डाले रहते हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले जरूरतमंद लोगों को जगह नहीं मिल पाती। रात के समय यहाँ भारी भीड़ और असुरक्षा का माहौल बना रहता है। बाहरी लोगों द्वारा स्टेशन के बाहर ही खाना भी बनाया जाता है।
स्टेशन परिसर की पार्किंग व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि गाड़ी खड़ी करते समय कोई कर्मचारी व्यवस्था बनाने के लिए मौजूद नहीं रहता, जिससे अव्यवस्थित पार्किंग के कारण जाम की स्थिति बन जाती है। लेकिन, जैसे ही यात्री वाहन लेकर बाहर निकलता है, कर्मचारी तुरंत वसूली के लिए पहुंच जाते हैं।
मुख्य मार्ग पर गंदगी का अंबार
स्टेशन जाने वाले मुख्य रास्ते के दोनों ओर फैला कचरा और गंदा पानी शहर की छवि खराब कर रहा है। सुलभ शौचालय बनने के बावजूद लोग स्टेशन के मुख्य द्वारा के रास्ते का उपयोग प्रसाधन के लिए करते है जिससे इतनी बदबू होती है कि कोई एक मिनट भी खड़ा नही रह पाता.
होटल एजेंटों की दादागिरी और ठगी
स्टेशन के मुख्य मार्ग पर स्थित होटलों के कर्मचारियों ने यात्रियों का निकलना मुश्किल कर दिया है। रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही एजेंट यात्रियों को जबरदस्ती अपने होटलों की ओर खींचने का प्रयास करते हैं। नए और अनजान यात्री अक्सर इन एजेंटों के झांसे में आकर ठगी और असुविधा का शिकार हो जाते हैं।
प्रकाश विश्वकर्मा ने रेलवे स्टेशन की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्टेशन के बाहर डस्टबिन की भारी कमी है, जिसके कारण लोग यहाँ-वहाँ कचरा फेंकने को मजबूर हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि स्टेशन को स्वच्छ और सुंदर बनाना है, तो पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए जाएं और कचरा प्रबंधन की एक नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
स्थानीय निवासी नीरज बुनकर ने चिंता जताते हुए कहा कि रेलवे स्टेशन की ओर आने वाले मुख्य रास्तों पर गंदगी का अंबार लगा रहता है। समय पर कचरा न उठाए जाने के कारण सड़कों पर प्लास्टिक और खाने-पीने का जूठन बिखरा रहता है। नीरज के अनुसार, स्टेशन शहर का प्रवेश द्वार होता है और ऐसी गंदगी बाहर से आने वाले यात्रियों के मन में शहर की बहुत ही नकारात्मक छवि पेश करती है।
राज प्रजापति ने बताया कि यहाँ सफाई के साथ-साथ यातायात प्रबंधन भी बदहाल है। लोग कहीं भी अपनी मर्जी से अपने वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे यात्रियों को निकलने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मौके पर सुरक्षाकर्मियों की अनुपस्थिति के कारण यात्रियों में सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता है।
अनूप विश्वकर्मा ने बताया कि स्टेशन मार्ग पर लोग रास्तों के किनारे ही पेशाब कर देते हैं, जिससे वहां से गुजरना मुश्किल हो गया है। हैरानी की बात यह है कि पास ही सुलभ शौचालय की सुविधा उपलब्ध है, फिर भी लोग इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं। अनूप ने प्रशासन से अपील की है कि इस ओर कड़े कदम उठाए जाएं ताकि सफाई बनी रहे और यात्रियों को दुर्गंध का सामना न करना पड़े।
